maze ishq ke kuchh vahii jaante hain | मज़े इश्क़ के कुछ वही जानते हैं

  - Dagh Dehlvi
मज़ेइश्क़केकुछवहीजानतेहैं
किजोमौतकोज़िंदगीजानतेहैं
शब-ए-वस्ललींउनकीइतनीबलाएँ
किहमदममिरेहाथहीजानतेहैं
होदिलतोक्यालुत्फ़-ए-आज़ार-ओ-राहत
बराबरख़ुशीना-ख़ुशीजानतेहैं
जोहैमेरेदिलमेंउन्हींकोख़बरहै
जोमैंजानताहूँवहीजानतेहैं
पड़ाहूँसर-ए-बज़्ममैंदमचुराए
मगरवोइसेबे-ख़ुदीजानतेहैं
कहाँक़द्र-ए-हम-जिंसहम-जिंसकोहै
फ़रिश्तोंकोभीआदमीजानतेहैं
कहूँहाल-ए-दिलतोकहेंउससेहासिल
सभीकोख़बरहैसभीजानतेहैं
वोनादानअंजानभोलेहैंऐसे
किसबशेवा-ए-दुश्मनीजानतेहैं
नहींजानतेइसकाअंजामक्याहै
वोमरनामेरादिल-लगीजानतेहैं
समझताहैतू'दाग़'कोरिंदज़ाहिद
मगररिंदउसकोवलीजानतेहैं
  - Dagh Dehlvi
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