khil uthe hain zakham phoolon ki tarah | खिल उठे हैं ज़ख़्म फूलों की तरह

  - Chhabi Saksena Sahai Saba
खिलउठेहैंज़ख़्मफूलोंकीतरह
कोईआयाहैबहारोंकीतरह
हसरतोंकीबद-नसीबीदेखिए
बुझगईंसारीचराग़ोंकीतरह
ख़्वाबकीभीसिसकियाँसुनलीजिए
टूटकेबिखरेहैंशीशोंकीतरह
सरसरीसीइकनज़रउनकीपड़ी
आजहमभीहैंहज़ारोंकीतरह
लुत्फ़जानेकाजहाँसेबढ़केहो
यादगरआऊँमिसालोंकीतरह
अब'सबा'कबतककरेगीइंतिज़ार
उसकाआनाहैहवाओंकीतरह
  - Chhabi Saksena Sahai Saba
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