faza-e-aadmiyat ko sanwarne hi nahin dete | फ़ज़ा-ए-आदमियत को सँवरने ही नहीं देते

  - Charan Singh Bashar
फ़ज़ा-ए-आदमियतकोसँवरनेहीनहींदेते
सियासत-दाँदिलोंकेज़ख़्मभरनेहीनहींदेते
ज़मानावोभीथाजबहादसेकाडरसताताथा
मगरअबहादसेलोगोंकोडरनेहीनहींदेते
कुछहमनेख़्वाबऐसेपालरक्खेहैंकिजोहमको
हक़ीक़तकीज़मींपरपाँवरखनेहीनहींदेते
येमानाइश्क़सेबनतीहैजन्नतज़िंदगीलेकिन
मसाइलज़िंदगीसेइश्क़करनेहीनहींदेते
गुज़रगाहोंकेआगेमंज़िलेंआवाज़देतीहैं
मगरठहरेहुएलम्हेगुज़रनेहीनहींदेते
'बशर'बे-रहमहैंयेपर्बतोंजैसेउसूलअपने
किसीकेदिलकीवादीमेंउतरनेहीनहींदेते
  - Charan Singh Bashar
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