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Charagh
main jaagta pahle vo ruksat ho gaya tha kal
main jaagta pahle vo ruksat ho gaya tha kal | मैं जागता पहले वो रुक्सत हो गया था कल
- Charagh
मैं
जागता
पहले
वो
रुक्सत
हो
गया
था
कल
ख़्वाब
आया
था
फ़क़त
मैं
सो
गया
था
कल
- Charagh
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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कभी
जो
ख़्वाब
था
वो
पा
लिया
है
मगर
जो
खो
गई
वो
चीज़
क्या
थी
Javed Akhtar
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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माना
कि
सब
के
सामने
मिलने
से
है
हिजाब
लेकिन
वो
ख़्वाब
में
भी
न
आएँ
तो
क्या
करें
Akhtar Shirani
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ये
ज़रूरी
है
कि
आँखों
का
भरम
क़ाएम
रहे
नींद
रक्खो
या
न
रक्खो
ख़्वाब
मेयारी
रखो
Rahat Indori
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हमको
हमारी
नींद
भी
वापस
नहीं
मिली
लोगों
को
उनके
ख़्वाब
जगा
कर
दिए
गए
Imran Aami
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नए
दौर
के
नए
ख़्वाब
हैं
नए
मौसमों
के
गुलाब
हैं
ये
मोहब्बतों
के
चराग़
हैं
इन्हें
नफ़रतों
की
हवा
न
दे
Bashir Badr
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कटती
है
आरज़ू
के
सहारे
पे
ज़िंदगी
कैसे
कहूँ
किसी
की
तमन्ना
न
चाहिए
Shaad Arfi
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जवाब
आते
थे
के
अबके
राख
आई
है
ख़त
जलाने
का
रिवाज़
था
मगर
पढ़ने
के
बाद
सोचा
की
न
लिखेंगे
अब,
जो
थी
बातें
हो
चुकी
मैंने
लिखा
है
तुम्हें,
ख़ुद
से
बहुत
लड़ने
के
बाद
अबके
टूटा
है
कि
यूँँ
जुड़ता
नज़र
आता
नहीं
रहिमन
धागा
प्रेम
का
है,
गाँठ
पड़ने
के
बाद
घर
मेरा
था,
अब
होता
जा
रहा
मज़ार
है
वो
लौट
आएँगे,
यक़ीनन
मेरे
मरने
के
बाद
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Charagh
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मैं
बैठा
उसकी
सोच
में
हूँ,
कुछ
असमंजस
संकोच
में
हूँ
मेरी
नींदें
तो
उसकी
हैं,
क्या
जाग
रही
वो
भी
होगी?
Charagh
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फिर
रहे
जागते
रात
को
हम,
फिर
रात
चुनौती
हार
गई
हम
पर
जो
गुज़री
सो
गुज़री,
रात
पे
गुज़री
होगी
क्या
Charagh
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जानता
हूँ,
है
जहाँ
ये
झूठ
लेकिन
मैं
भरोसा
तुम
पे
करना
चाहता
हूँ
Charagh
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