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Charagh
jaanta hooñ hai jahaan ye jhooth lekin
jaanta hooñ hai jahaan ye jhooth lekin | जानता हूँ, है जहाँ ये झूठ लेकिन
- Charagh
जानता
हूँ,
है
जहाँ
ये
झूठ
लेकिन
मैं
भरोसा
तुम
पे
करना
चाहता
हूँ
- Charagh
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बस्ती
बस्ती
ख़ाक
उड़ाये,
बस
वहशत
का
मारा
हो
उस
सेे
इश्क़
की
आस
न
करना
जिसका
मन
बंजारा
हो
ख़ुद
को
शाइर
कहते
रहना
दिल
को
लाख
सुकूँ
दे
दे
लेकिन
दुनिया
की
नज़रों
में
तुम
अब
भी
आवारा
हो
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Daagh Aligarhi
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आस-पास
देखा
था
मैंने
फूट
के
रोने
से
पहले
जैसे
कोई
जेबें
देखे
कपड़े
धोने
से
पहले
हम
तकिए
के
नीचे
रखते
हैं
यूँँ
तेरी
तस्वीरें
जैसे
सिरहाने
रखते
हैं
पानी
सोने
से
पहले
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Tanoj Dadhich
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हर-चंद
ए'तिबार
में
धोके
भी
हैं
मगर
ये
तो
नहीं
किसी
पे
भरोसा
किया
न
जाए
Jaan Nisar Akhtar
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या
तेरे
अलावा
भी
किसी
शय
की
तलब
है
या
अपनी
मोहब्बत
पे
भरोसा
नहीं
हम
को
Shahryar
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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है
दुख
तो
कह
दो
किसी
पेड़
से
परिंदे
से
अब
आदमी
का
भरोसा
नहीं
है
प्यारे
कोई
Madan Mohan Danish
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जान
तुझ
पर
कुछ
ए'तिमाद
नहीं
ज़िंदगानी
का
क्या
भरोसा
है
Khan Arzoo Sirajuddin Ali
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झूट
पर
उसके
भरोसा
कर
लिया
धूप
इतनी
थी
कि
साया
कर
लिया
Shariq Kaifi
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तू
कहीं
आस-पास
था
वो
तिरा
इल्तिबास
था
मैं
उसे
देखता
रहा
फिर
मुझे
नींद
आ
गई
Rais Farog
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बिखर
के
फूल
फ़ज़ाओं
में
बास
छोड़
गया
तमाम
रंग
यहीं
आस-पास
छोड़
गया
Aanis Moin
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जवाब
आते
थे
के
अबके
राख
आई
है
ख़त
जलाने
का
रिवाज़
था
मगर
पढ़ने
के
बाद
सोचा
की
न
लिखेंगे
अब,
जो
थी
बातें
हो
चुकी
मैंने
लिखा
है
तुम्हें,
ख़ुद
से
बहुत
लड़ने
के
बाद
अबके
टूटा
है
कि
यूँँ
जुड़ता
नज़र
आता
नहीं
रहिमन
धागा
प्रेम
का
है,
गाँठ
पड़ने
के
बाद
घर
मेरा
था,
अब
होता
जा
रहा
मज़ार
है
वो
लौट
आएँगे,
यक़ीनन
मेरे
मरने
के
बाद
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Charagh
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मैं
जागता
पहले
वो
रुक्सत
हो
गया
था
कल
ख़्वाब
आया
था
फ़क़त
मैं
सो
गया
था
कल
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मैं
बैठा
उसकी
सोच
में
हूँ,
कुछ
असमंजस
संकोच
में
हूँ
मेरी
नींदें
तो
उसकी
हैं,
क्या
जाग
रही
वो
भी
होगी?
Charagh
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फिर
रहे
जागते
रात
को
हम,
फिर
रात
चुनौती
हार
गई
हम
पर
जो
गुज़री
सो
गुज़री,
रात
पे
गुज़री
होगी
क्या
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