sokhta-jaan sokhta-dil | सोख़्ता-जाँ सोख़्ता-दिल

  - Chandrabhan Khayal
सोख़्ता-जाँसोख़्ता-दिल
सोख़्तारूहोंकेघरमें
राखगर्द-ए-आतिशींशोलोंकेसाए
नक़्शहैंदीवारोंपरमफ़रूक़चेहरे
लौटचलिएअपनेसबअरमानलेकर
झूटहैगुज़राज़माना
औरकिसीउजड़ेक़बीलेकीभटकतीरूहशायद
अपनेमुस्तक़बिलकाधुँदलासातसव्वुर
बहर-ए-ग़मकेदरमियाँहै
एककालेकोहकीमानिंदयेइमरोज़अपना
कोहजिसपररक़्सकरतेहैंसितम-ख़ुर्दातमन्नाओंकेआसेब
लौटचलिए
अपनेसबअरमानलेकर
सोचिएतो
यूँँअबसआतिश-कदोंमेंक्यूँँजलेंदिल
क्यूँँरहेंहरवक़्तसीनोंपरचटानें
देखिएतो
चंदलुक़्मेंकुछकिताबें
एकबिस्तरएकऔरत
औरकिराएकायेख़ालीतंगकमरा
आजअपनीज़ीस्तकामरकज़हैंलेकिन
तीरगीकाग़मइन्हेंभीखारहाहै
चारजानिबज़हरफैलाजारहाहै
लौटचलिए
अपनेसबअरमानलेकर
अपनेसबपैमानलेकर
जिस्मलेकरजानलेकर
  - Chandrabhan Khayal
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