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Brajnabh Pandey
mujhse kaho kuchh jaañ ke ik arsa hua
mujhse kaho kuchh jaañ ke ik arsa hua | मुझ सेे कहो कुछ जाँ के इक अर्सा हुआ
- Brajnabh Pandey
मुझ
सेे
कहो
कुछ
जाँ
के
इक
अर्सा
हुआ
मुझको
किसी
की
बात
को
माने
हुए
- Brajnabh Pandey
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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हम
जान
से
जाएँगे
तभी
बात
बनेगी
तुम
से
तो
कोई
राह
निकाली
नहीं
जाती
Wasi Shah
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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इश्क़
माशूक़
इश्क़
'आशिक़
है
यानी
अपना
ही
मुब्तला
है
इश्क़
Meer Taqi Meer
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वही
शागिर्द
फिर
हो
जाते
हैं
उस्ताद
ऐ
'जौहर'
जो
अपने
जान-ओ-दिल
से
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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ये
हक़ीक़त
है,
मज़हका
नहीं
है
वो
बहुत
दूर
है,
जुदा
नहीं
है
तेरे
होंटों
पे
रक़्स
करता
है
राज़
जो
अब
तलक
खुला
नहीं
है
जान
ए
जांँ
तेरे
हुस्न
के
आगे
ये
जो
शीशा
है,
आइना
नहीं
है
क्यूँ
शराबोर
हो
पसीने
में
मैं
ने
बोसा
अभी
लिया
नहीं
है
उस
का
पिंदार
भी
वहीं
का
वहीं
मेरे
लब
पर
भी
इल्तेजा
नहीं
है
जो
भी
होना
था
हो
चुका
काज़िम
अब
किसी
से
हमें
गिला
नहीं
है
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Kazim Rizvi
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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हमने
तो
बस
दु'आ
ही
किया
था
मगर
मेरी
जाँ
तुम
तो
सच
मुच
चले
आए
हो
Brajnabh Pandey
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तू
आ
सिमट
जा
बाँहों
में
तो
मैं
बताऊँ
दुनिया
को
अपने
गले
भी
इस
जहाँ
में
अब
लगा
जा
सकता
है
Brajnabh Pandey
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तेरी
मुहब्बत
की
कोई
क़ीमत
नहीं
दे
सकता
मैं
पर
लाया
हूँ
बहना
ये
तोहफ़ा
तेरी
राखी
के
लिए
Brajnabh Pandey
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उसको
समझने
में
बड़े
मन
से
जुटा
हूँ
यार
मैं
मैं
हूँ
वही
जो
आज
तक
समझा
नहीं
ख़ुद
को
कभी
Brajnabh Pandey
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खोल
दी
देखने
को
ये
कमबख़्त
आँख
ख़्वाब
में
वो
हमारी
गली
आए
थे
Brajnabh Pandey
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