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Brajnabh Pandey
kiya tha tay ki KHvaabon ka shahar apna banaayenge
kiya tha tay ki KHvaabon ka shahar apna banaayenge | किया था तय कि ख़्वाबों का शहर अपना बनाएँगे
- Brajnabh Pandey
किया
था
तय
कि
ख़्वाबों
का
शहर
अपना
बनाएँगे
ख़बर
क्या
थी
कि
बस
इक
ख़्वाब
से
ही
टूट
जाएँगे
- Brajnabh Pandey
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तुझे
कैसे
इल्म
न
हो
सका
बड़ी
दूर
तक
ये
ख़बर
गई
तिरे
शहर
ही
की
ये
शाएरा
तिरे
इंतिज़ार
में
मर
गई
Mumtaz Naseem
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मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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पारा-ए-दिल
है
वतन
की
सर
ज़मीं
मुश्किल
ये
है
शहर
को
वीरान
या
इस
दिल
को
वीराना
कहें
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Majrooh Sultanpuri
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'अंजुम'
तुम्हारा
शहर
जिधर
है
उसी
तरफ़
इक
रेल
जा
रही
थी
कि
तुम
याद
आ
गए
Anjum Rehbar
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बंदा
किसी
के
साथ,
ख़ुदा
हो
किसी
के
साथ
जाने
पराए
शहर
में
क्या
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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बाक़ी
नहीं
रहा
है
कोई
रब्त
शहरस
यानी
कि
ख़ुश
रहेंगे
यहाँ
ख़ुश
रहे
बग़ैर
pankaj pundir
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'इंशा'-जी
उठो
अब
कूच
करो
इस
शहर
में
जी
को
लगाना
क्या
वहशी
को
सुकूँ
से
क्या
मतलब
जोगी
का
नगर
में
ठिकाना
क्या
Ibn E Insha
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शब
की
हवा
से
हार
गई
मेरे
दिल
की
आग
यख़-बस्ता
शहर
में
कोई
रद्द-ओ-बदल
न
था
Qaisar-ul-Jafri
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अनोखी
वज़्अ
है
सारे
ज़माने
से
निराले
हैं
ये
'आशिक़
कौन
सी
बस्ती
के
या-रब
रहने
वाले
हैं
Allama Iqbal
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तू
आ
सिमट
जा
बाँहों
में
तो
मैं
बताऊँ
दुनिया
को
अपने
गले
भी
इस
जहाँ
में
अब
लगा
जा
सकता
है
Brajnabh Pandey
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है
मुझे
तेरे
बदन
की
चाह
कुछ
इस
तरह
जाना
मौत
ही
को
चाहता
हो
इक
मरीज़
ए
इश्क़
जैसे
Brajnabh Pandey
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जान
क्यूँँ
तू
मुझको
घाइल
कर
रहा
है
दिल
भी
मुझ
सेे
यार
दंगल
कर
रहा
है
क्या
बताऊँ
खलबली
दिल
में
मची
है
मुझको
तेरा
हुस्न
पागल
कर
रहा
है
ज़िंदगी
मेरी
तो
बंजर
हो
गई
है
पर
ये
तेरा
प्यार
बादल
कर
रहा
है
दश्त
का
माहौल
सा
था
तू
जो
बिछड़ा
फिर
तू
आ
कर
मुझ
को
जंगल
कर
रहा
है
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Brajnabh Pandey
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दो
लड़कियों
से
दिल
लगा
बैठा
था
मैं
सो
चार
हिस्से
हो
गए
हैं
दिल
के
अब
Brajnabh Pandey
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इक
ही
उम्मीद
पे
तो
ज़िंदा
हूँ
मौत
आकर
बचाएगी
मुझको
Brajnabh Pandey
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