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Bhaskar Shukla
ek KHvaahish meri ye bhi thii ki duniya dekhooñ
ek KHvaahish meri ye bhi thii ki duniya dekhooñ | एक ख़्वाहिश मेरी ये भी थी कि दुनिया देखूँ
- Bhaskar Shukla
एक
ख़्वाहिश
मेरी
ये
भी
थी
कि
दुनिया
देखूँ
तू
मगर
साथ
नहीं
है
तो
भला
क्या
देखूँ
तेरा
लिक्खा
जो
पढ़ूँ
तो
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तेरी
आवाज़
सुनूँ
तो
तेरा
चेहरा
देखूँ
रात
छत
पर
मैं
सितारों
से
गढ़ूँ
इक
पैकर
फिर
वही
नक़्श
खलाओं
में
उभरता
देखूँ
ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
- Bhaskar Shukla
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सात
टुकड़े
हुए
मेरे
दिल
के
एक
हफ़्ता
लगा
सँभलने
में
Tanoj Dadhich
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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दिल
बना
दोस्त
तो
क्या
क्या
न
सितम
उस
ने
किए
हम
भी
नादां
थे
निभाते
रहे
नादान
के
साथ
Shakeel Badayuni
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बदले
मौसम
हालात
यहाँ
है
ख़ुशियों
की
बारात
यहाँ
होली
खेलेंगे
हम
भी
पर
खेलेंगे
तेरे
साथ
यहाँ
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Kaviraj " Madhukar"
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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ख़मोश
झील
के
पानी
में
वो
उदासी
थी
कि
दिल
भी
डूब
गया
रात
माहताब
के
साथ
Rehman Faris
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शर्तें
लगाई
जाती
नहीं
दोस्ती
के
साथ
कीजे
मुझे
क़ुबूल
मिरी
हर
कमी
के
साथ
Waseem Barelvi
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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निभाया
जिस
सेे
भी
रिश्ता
तो
फिर
हद
में
रहे
हैं
हम
किसी
के
मखमली
तकिए
के
ऊपर
सर
नहीं
रक्खा
Nirbhay Nishchhal
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ख़्वाहिश
है
इन
गुलों
को
दवामी
बहार
दूँ
जितने
किए
हैं
इश्क़
सुख़न
में
उतार
दूँ
Bhaskar Shukla
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मुस्कुराहट
ओढ़कर
यूँँ
ही
नहीं
रहता
हूँ
मैं
झाँककर
देखो
कभी
अंदर
बहुत
टूटा
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
भर
का
तो
वा'दा
ज़िन्दगी
से
कर
लिया
हाँ
मगर
ऐ
मौत
!
उसके
बाद
बस
तेरा
हूँ
मैं
काश
!
झूठा
ही
सही,
वो
पूछता
कैसे
हो
तुम
मैं
भुला
देता
हर
इक
ग़म,
बोलता,
अच्छा
हूँ
मैं
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Bhaskar Shukla
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तुम्हें
मैं
क्या
बताऊँ
इस
शहर
का
हाल
कैसा
है
यहाँ
बारिश
तो
होती
है
मगर
सावन
नहीं
आता
Bhaskar Shukla
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शोर
में
आवाज़
मुदग़म
क्यूँ
करें
कर
रहे
हैं
जो
सभी
हम
क्यूँ
करें
सरफ़रोशी
की
तमन्ना
है
हमें
ज़ुल्म
के
आगे
नज़र
ख़म
क्यूँ
करें
रौशनी
के
वास्ते
जल
जाएँ
हम
तीरगी
का
ख़ैर-मक़्दम
क्यूँ
करें
रास्ता
हमने
चुना
है
सोचकर
मुश्किलें
तो
आएंगी,
ग़म
क्यूँ
करें
ये
तिरंगा
ही
हमारी
शान
है
हम
इसे
यकरंग
परचम
क्यूँ
करें
आप
अपनी
नफ़रतें
कम
कीजिए
हम
मोहोब्बत
को
भला
कम
क्यूँ
करें
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Bhaskar Shukla
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ये
भी
अच्छा
हुआ
मौत
ने
आकर
हमको
बचा
लिया
वरना
हालत
ऐसी
थी,
हम
शायर
भी
हो
सकते
थे
Bhaskar Shukla
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