na jee bhar ke dekha na kuchh baat ki | न जी भर के देखा न कुछ बात की

  - Bashir Badr
जीभरकेदेखाकुछबातकी
बड़ीआरज़ूथीमुलाक़ातकी
उजालोंकीपरियाँनहानेलगीं
नदीगुनगुनाईख़यालातकी
मैंचुपथातोचलतीहवारुकगई
ज़बाँसबसमझतेहैंजज़्बातकी
मुक़द्दरमिरीचश्म-ए-पुर-आबका
बरसतीहुईरातबरसातकी
कईसालसेकुछख़बरहीनहीं
कहाँदिनगुज़ाराकहाँरातकी
  - Bashir Badr
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