musaafir ke raaste badalte rahe | मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे

  - Bashir Badr
मुसाफ़िरकेरस्तेबदलतेरहे
मुक़द्दरमेंचलनाथाचलतेरहे
मिरेरास्तोंमेंउजालारहा
दिएउसकीआँखोंमेंजलतेरहे
कोईफूलसाहाथकाँधेपेथा
मिरेपाँवशो'लोंपेजलतेरहे
सुनाहैउन्हेंभीहवालगगई
हवाओंकेजोरुख़बदलतेरहे
वोक्याथाजिसेहमनेठुकरादिया
मगरउम्रभरहाथमलतेरहे
मोहब्बतअदावतवफ़ाबे-रुख़ी
किराएकेघरथेबदलतेरहे
लिपटकरचराग़ोंसेवोसोगए
जोफूलोंपेकरवटबदलतेरहे
  - Bashir Badr
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