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Bashir Badr
mujh se bichhad ke KHush rahte ho
mujh se bichhad ke KHush rahte ho | मुझ से बिछड़ के ख़ुश रहते हो
- Bashir Badr
मुझ
से
बिछड़
के
ख़ुश
रहते
हो
मेरी
तरह
तुम
भी
झूटे
हो
इक
दीवार
पे
चाँद
टिका
था
मैं
ये
समझा
तुम
बैठे
हो
उजले
उजले
फूल
खिले
थे
बिल्कुल
जैसे
तुम
हँसते
हो
मुझ
को
शाम
बता
देती
है
तुम
कैसे
कपड़े
पहने
हो
दिल
का
हाल
पढ़ा
चेहरे
से
साहिल
से
लहरें
गिनते
हो
तुम
तन्हा
दुनिया
से
लड़ोगे
बच्चों
सी
बातें
करते
हो
- Bashir Badr
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इस
दौर
के
मर्दों
की
जो
की
शक्ल-शुमारी
साबित
हुआ
दुनिया
में
ख़्वातीन
बहुत
हैं
Sarfaraz Shahid
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चलो
ऐ
हिंद
के
सैनिक
कि
लहराएँ
तिरंगा
हम
जिसे
दुनिया
नमन
करती
है
उस
पर्वत
की
चोटी
पर
ATUL SINGH
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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दुनिया
के
ताने
सह
लेता
हूँ
इक
अच्छा
बेटा
कहलाना
है
Neeraj Neer
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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बताऊँ
क्या
तुझे
ऐ
हम-नशीं
किस
से
मोहब्बत
है
मैं
जिस
दुनिया
में
रहता
हूँ
वो
इस
दुनिया
की
औरत
है
Asrar Ul Haq Majaz
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हो
गए
राम
जो
तुम
ग़ैर
से
ए
जान-ए-जहाँ
जल
रही
है
दिल-ए-पुर-नूर
की
लंका
देखो
Kalb-E-Hussain Nadir
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अपनी
दुनिया
भी
चल
पड़े
शायद
इक
रुका
फ़ैसला
किया
जाए
Madan Mohan Danish
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ये
जितने
मसाइल
हैं
दुनिया
में,
सब
तुझे
देखने
से
सुलझ
जाएँगे
Siddharth Saaz
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एक
तरफ़
है
पूरी
दुनिया
एक
तरफ़
है
मेरा
घर
लेकिन
तुमको
बतला
दूँ
मैं
दुनिया
से
है
अच्छा
घर
सब
कमरों
की
दीवारों
पर
तस्वीरें
हैं
बस
तेरी
मुझ
सेे
ज़ियादा
तो
लगता
है
जानेमन
ये
तेरा
घर
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Tanoj Dadhich
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शोहरत
की
बुलंदी
भी
पल
भर
का
तमाशा
है
जिस
डाल
पे
बैठे
हो
वो
टूट
भी
सकती
है
Bashir Badr
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भूल
शायद
बहुत
बड़ी
कर
ली
दिल
ने
दुनिया
से
दोस्ती
कर
ली
Bashir Badr
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अज़्मतें
सब
तिरी
ख़ुदाई
की
हैसियत
क्या
मिरी
इकाई
की
मिरे
होंटों
के
फूल
सूख
गए
तुम
ने
क्या
मुझ
से
बे-वफ़ाई
की
सब
मिरे
हाथ
पाँव
लफ़्ज़ों
के
और
आँखें
भी
रौशनाई
की
मैं
ही
मुल्ज़िम
हूँ
मैं
ही
मुंसिफ़
हूँ
कोई
सूरत
नहीं
रिहाई
की
इक
बरस
ज़िंदगी
का
बीत
गया
तह
जमी
एक
और
काई
की
अब
तरसते
रहो
ग़ज़ल
के
लिए
तुम
ने
लफ़्ज़ों
से
बे-वफ़ाई
की
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Bashir Badr
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वो
नहीं
मिला
तो
मलाल
क्या,
जो
गुज़र
गया
सो
गुज़र
गया
उसे
याद
करके
ना
दिल
दुखा,
जो
गुज़र
गया
सो
गुज़र
गया
Bashir Badr
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मुझे
मालूम
है
उस
का
ठिकाना
फिर
कहाँ
होगा
परिंदा
आसमाँ
छूने
में
जब
नाकाम
हो
जाए
Bashir Badr
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