mirii zindagi bhi mirii nahin ye hazaar khaanon men bat gaii | मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई

  - Bashir Badr
मिरीज़िंदगीभीमिरीनहींयेहज़ारख़ानोंमेंबटगई
मुझेएकमुट्ठीज़मीनदेयेज़मीनकितनीसिमटगई
तिरीयादआएतोचुपरहूँज़राचुपरहूँतोग़ज़लकहूँ
येअजीबआगकीबेलथीमिरेतन-बदनसेलिपटगई
मुझेलिखनेवालालिखेभीक्यामुझेपढ़नेवालापढ़ेभीक्या
जहाँमेरानामलिखागयावहींरौशनाईउलटगई
कोईख़ुशीमलालहैकिसभीकाएकसाहालहै
तिरेसुखकेदिनभीगुज़रगएमिरीग़मकीरातभीकटगई
मिरीबंदपलकोंपरटूटकरकोईफूलरातबिखरगया
मुझेसिसकियोंनेजगादियामिरीकच्चीनींदउचटगई
  - Bashir Badr
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