meri nazar ko teri koii justajoo nahin | मेरी नज़र को तेरी कोई जुस्तजू नहीं

  - Dharmesh bashar
मेरीनज़रकोतेरीकोईजुस्तजूनहीं
वोकौनसीजगहहैजहाँपरकितूनहीं
सबमेंहीदेखताहूँतिराशिर्कत-ए-वजूद
तेरेजहाँमेंकोईभीमेराअदूनहीं
जाऊँमैंकिसकेदरपेतिरेदरकोछोड़कर
तुझ-साकरम-नवाज़कोईचार-सूनहीं
तेरेसहारेछोड़दियाअपनेआपको
पालूँतुझेतोऔरकोईआरज़ूनहीं
करताहूँमैंनदामत-ए-इस्याँसेदिलकोपाक
मेरीनमाज़-ए-इश्क़मेंक़ैद-ए-वुज़ूनहीं
बनकेबहारगुलशन-ए-हस्तीमेंकभी
तेरेबग़ैरज़िन्दगीमेंरंग-ओ-बूनहीं
दिलकीहरएकबातसुनेजारहाहैतू
ज़ाहिरमेंतुझसेेमेरीकोईगुफ़्तगूनहीं
मंज़िलपेगयाहै'बशर'कारवान-ए-इश्क़
येवोमक़ामहैकिजहाँमैं-ओ-तूनहीं
  - Dharmesh bashar
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