us kamre ki tarteeb se | उस कमरे की तरतीब से

  - Balraj Komal
उसकमरेकीतरतीबसे
मैंमानूसथा
उसकीहरशयसे
पत्थरसेदीवारोंसे
छोटीछोटीचीज़ोंऔरकिताबोंसे
मुतरन्निमआवाज़ोंसे
शोरमचातेहँसते-गाते
गाहे-गाहेलम्हा-भरको
चुपहोजाते
अपनेअपनेआसमाँसे
तन्हाईमें
सुखऔरदुखकीबातेंकरतेलोगोंसे
नन्ही-मुन्नीसरगोशीमेंजादूभरती
गुड़ियासे
रंगलुटातेउसकेनट-खटगुड्डेसे
तुमतोमेरेअपनेथे
तुमनेयेक्याकरडाला
तुमनेअपनेहाथसे
मेरीबरसोंकीमानूसलकीरें
दरहम-बरहमकरडालें
आवाज़ोंकीरागनियोंकीतस्वीरोंकी
रौशनआँखें
तुमतोमेरेअपनेथे
तुमनेयेक्याकरडाला
  - Balraj Komal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy