raahguzaar par shor-o-ghul ka sail hai | रहगुज़र पर शोर-ओ-ग़ुल का सैल है

  - Balraj Komal
रहगुज़रपरशोर-ओ-ग़ुलकासैलहै
बहरहाहैख़ुश्कतिनकेकीतरह
येजहान-ए-रंग-ओ-बू
घूमतेपहियोंधड़कतीगाड़ियोंकीहिचकियाँ
दास्ताँ-दर-दास्ताँउलझीहुईहैंचार-सू
दर्दसेसह
मेंहुएख़्वाबोंकेलाखोंक़ाफ़िले
गामज़नहैंसू-ए-हसरतहौसलेथा
मेंहुए
मैंभीउनमेंतुमभीइनमेंसारीदुनियाउनमेंहै
ख़ामुशीभीनग़्मगीभीअश्क-ओ-ख़ूँभीउनमेंहै
कुछनिगाहेंअर्शपरहैंकुछनिगाहेंफ़र्शपर
वक़्तआँधीकीतरह
कररहाहैतेज़-तरइससैलको
हमकहाँहैंकौनसीमंज़िलपेहैं
कोईबतलाओकोईआवाज़दो
कोईबतलाओकोईआवाज़दो
  - Balraj Komal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy