makaan jal chuka hai | मकाँ जल चुका है

  - Balraj Komal
मकाँजलचुकाहै
खंडरहैसियाहीहैबुझतीहुईराखकीसिसकियाँहैं
मिरीआँखपुर-नमहै
चुप-चापगुम-सुमखड़ाहूँयहाँपर
मिरेआँसुओंमें
तसावीरहैं
माज़ी-ओ-हालकी
वक़्तकीमंज़िलोंकी
मिरेज़ेहनमेंदास्ताँहै
ज़मानेकेबननेबिगड़नेकी
तामीर-ओ-तख़रीबकीधड़कनोंकी
मिरेकानमेंगूँजतीहैंवोनर्मऔरशीरींसदाएँ
जिन्हेंआगनेइसमकानकेखंडरमेंफ़नाकरदियाहै
मोहब्बतकीतक़्दीस
मा'सूमशम्ओं'केअश्कोंकीगर्मी
धोएँकीतड़पतीहुईधारियाँ
उनकापैग़ामबनकर
फ़ज़ाओंमेंशायदभटकनेलगीहैं
मिरीआँखपुर-नमहैफिरभीमैंख़ुशहूँ
मिरेपासख़्वाबोंकीमा'सूमठंडक
इरादोंकेरौशनसितारोंकीनर्मी
तख़य्युलकीबहतीहुईनग़्मगीहै
मैंयादोंकेमलबेपेतख़्लीक़काफूललेकरखड़ाहूँ
  - Balraj Komal
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