december cheekhta hai jab ragon men | दिसम्बर चीख़ता है जब रगों में

  - Balraj Komal
दिसम्बरचीख़ताहैजबरगोंमें
लुत्फ़सेआरीपरेशाँमहफ़िलोंमें
मुझकोवोबदनामदुश्मनयादआताहै
जोमेरेख़ूनकाप्यासागलीसेजबगुज़रताथा
मिरेआ'साबमेंइकसनसनीसीदौड़जातीथी
मैंइसलम्हेकीबरहमआगमेंजलताहुआ
महसूसकरताथा
मैंज़िंदाहूँमुसलसलहूँ
मैंज़िंदाहूँमुसलसलहूँ
वोदुश्मनमरगया
यादोस्तोंमिला
मेंसोचताहूँपूछताहूँ
कौनबतलाएगा
मेरेफ़िक्रऔरएहसासकीबे-सम्तरौ
बहतीहैरोज़-ओ-शब
दिसम्बरचीख़ताहैअब
कहाँमंज़िलकहाँमंज़िल
  - Balraj Komal
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