koi manzil bhi nahin hai koi rastaa bhi nahin | कोई मंज़िल भी नहीं है कोई रस्ता भी नहीं

  - Balbir Rathi
कोईमंज़िलभीनहींहैकोईरस्ताभीनहीं
औरसबमहव-ए-सफ़रहैंकोईरुकताभीनहीं
हरतरफ़बे-रंगसीगहरीउदासीकाजमाव
एकरंगींख़्वाबजोनज़रोंसेहटताभीनहीं
किसतरहथा
मेंहुएहैंख़ुदकोउसबस्तीकेलोग
कोईमुतवाज़िननहींहैऔरफिसलताभीनहीं
इकमुसलसलसीयेसई-ए-राइगाँयेकाविशें
एकपत्थरसायेमंज़रजोपिघलताभीनहीं
बे-सबबसीटीसदिलमेंमुस्तक़िलहोतीहुई
जज़्बा-ए-बेबाकजोदिलमेंउतरताभीनहीं
हरतरफ़येधूपहर-दमतेज़-तरहोतीहुई
मोमकाइकशहरलेकिनजोपिघलताभीनहीं
  - Balbir Rathi
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