ya mujhe afsar-e-shahaana banaya hota | या मुझे अफ़सर-ए-शाहाना बनाया होता

  - Bahadur Shah Zafar
यामुझेअफ़सर-ए-शाहानाबनायाहोता
यामिराताजगदायानाबनायाहोता
अपनादीवानाबनायामुझेहोतातूने
क्यूँँख़िरद-मंदबनायाबनायाहोता
ख़ाकसारीकेलिएगरचेबनायाथामुझे
काशख़ाक-ए-दर-ए-जानानाबनायाहोता
नश्शा-ए-इश्क़कागरज़र्फ़दियाथामुझको
उम्रकातंगपैमानाबनायाहोता
दिल-ए-सद-चाकबनायातोबलासेलेकिन
ज़ुल्फ़-ए-मुश्कींकातिरेशानाबनायाहोता
सूफ़ियोंकेजोथालायक़-ए-सोहबततोमुझे
क़ाबिल-ए-जलसा-ए-रिंदानाबनायाहोता
थाजलानाहीअगरदूरी-ए-साक़ीसेमुझे
तोचराग़-ए-दर-ए-मय-ख़ानाबनायाहोता
शोला-ए-हुस्नचमनमेंदिखायाउसने
वर्नाबुलबुलकोभीपरवानाबनायाहोता
रोज़मामूरा-ए-दुनियामेंख़राबीहै'ज़फ़र'
ऐसीबस्तीकोतोवीरानाबनायाहोता
  - Bahadur Shah Zafar
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