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Shubham Upwan
fariyaad hai zindagi aisa kuchh nahin
fariyaad hai zindagi aisa kuchh nahin | फ़रियाद है ज़िंदगी ऐसा कुछ नहीं
- Shubham Upwan
फ़रियाद
है
ज़िंदगी
ऐसा
कुछ
नहीं
बर्बाद
है
ज़िंदगी
ऐसा
कुछ
नहीं
उसके
ही
जाने
से
थोड़ा
सा
हूँ
दुखी
पर
याद
है
ज़िंदगी
ऐसा
कुछ
नहीं
वो
साथ
उसका
मुझे
अच्छा
लगता
पर
नाशाद
है
ज़िंदगी
ऐसा
कुछ
नहीं
प्यारे
भी
दिन
याद
आते
पर
आगे
अब
अपवाद
है
ज़िंदगी
ऐसा
कुछ
नहीं
अब
हौसला
डगमगाया
है
मेरा
पर
उफ़्ताद
है
ज़िंदगी
ऐसा
कुछ
नहीं
- Shubham Upwan
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चुपके
चुपके
रात
दिन
आँसू
बहाना
याद
है
हम
को
अब
तक
आशिक़ी
का
वो
ज़माना
याद
है
Hasrat Mohani
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याद
भी
आता
नहीं
कुछ
भूलता
भी
कुछ
नहीं
या
बहुत
मसरूफ़
हूँ
मैं
या
बहुत
फ़ुर्सत
में
हूँ
Bharat Bhushan Pant
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उसको
याद
करो
और
उसपर
शे'र
लिखो
दिन
भर
फ़ोन
चलाने
से
तो
बेहतर
है
Tanoj Dadhich
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नहीं
आती
तो
याद
उनकी
महीनों
तक
नहीं
आती
मगर
जब
याद
आते
हैं
तो
अक्सर
याद
आते
हैं
Hasrat Mohani
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वर्षों
की
सब
याद
सजा
के
रक्खी
है
घर
में
बस
सामान
नहीं
है,
समझा
कर
Shivam Tiwari
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पहले
तो
मेरी
याद
से
आई
हया
उन्हें
फिर
आइने
में
चूम
लिया
अपने-आप
को
Shakeb Jalali
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ग़ुर्बत
की
ठंडी
छाँव
में
याद
आई
उस
की
धूप
क़द्र-ए-वतन
हुई
हमें
तर्क-ए-वतन
के
बाद
Kaifi Azmi
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फिर
उसी
सितमगर
को
याद
कर
रहे
हैं
हम
यानी
बे-वजह
ग़म
ईजाद
कर
रहे
हैं
हम
Harsh saxena
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कैसे
किसी
की
याद
हमें
ज़िंदा
रखती
है
एक
ख़याल
सहारा
कैसे
हो
सकता
है
Jawwad Sheikh
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वफ़ा
करेंगे
निबाहेंगे
बात
मानेंगे
तुम्हें
भी
याद
है
कुछ
ये
कलाम
किस
का
था
Dagh Dehlvi
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जाने
कितने
बाद
सालों
आज
मैं
घर
आया
हूँ
तेरी
तन्हाई
से
घबरा
कर
में
डर
कर
आया
हूँ
सारे
गुलशन
में
मुझे
जो
फूल
प्यारा
लगता
था
मैं
कमल
के
फूल
से
अब
चोट
खाकर
आया
हूँ
रातें
कितनी
बीत
जाया
करती
थी
तन्हा
'शुभम'
अब
मैं
उसकी
यादों
को
गंगा
बहा
कर
आया
हूँ
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मैंने
भी
ग़ज़लें
तब
से
तो
गाई
नहीं
जब
से
यादें
तेरी
पास
आई
नहीं
ख़ुश
हूॅं
मैं
बात
यह
सोचकर
अब
तलक
झूठी
क़स
में
मोहब्बत
में
खाई
नहीं
रो
रहा
कबसे
यह
दिल
मेरा
अब
मगर
दोनों
की
इस
में
तो
बे-वफ़ाई
नहीं
ग़म
न
जाने
कि
हिस्से
में
कितना
लिखा
मैंने
क़िस्मत
मोहब्बत
की
पाई
नहीं
अंजुमन
में
भी
तुझको
ही
गाया
मगर
मेरी
आवाज़
तुझको
सुनाई
नहीं
कर
चुका
सौदा
मैं
तो
उदासी
से
अब
साथ
तेरे
मेरी
आशनाई
नहीं
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मैं
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
और
करता
ही
नहीं
दिल
से
मैं
अब
तो
किसी
के
भी
उतरता
ही
नहीं
ज़िंदगी
के
बारे
में
इतना
मैं
क्यूँँ
सोचूँ
भला
वो
मोहब्बत
मैं
मुझे
खोने
से
डरता
ही
नहीं
बेअसर
हो
जाती
है
अब
ज़िंदगी
से
ही
दु'आ
ज़िंदगी
में
रंग
अब
कोई
भी
भरता
ही
नहीं
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दूर
साया
मेरा
मुझ
से
तो
हो
गया
जिसको
पाना
था
लेकिन
वही
खो
गया
आरज़ू
थी
बड़ी
दिल
में
मेरे
तो
पर
जाते
जाते
वो
तो
पेड़
ग़म
बो
गया
कितना
ही
रास्ता
देख
लो
उसका
तो
करता
ही
अब
नहीं
वापसी
जो
गया
राह
में
मुझको
हमराही
इक
वो
मिला
उम्र
भर
वो
उदासी
में
अब
ढो
गया
जब
से
उम्मीद
टूटी
है
मेरी
तो
अब
ख़्वाब
उस
दिन
से
ही
मेरा
तो
सो
गया
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दोस्ती
में
मोहब्बत
को
लाने
लगे
ख़्वाब
हम
तेरे
अब
तो
सजाने
लगे
तेरी
यादों
का
सैलाब
छाया
है
अब
सच
में
हम
तो
मोहब्बत
को
गाने
लगे
है
नहीं
कुछ
भी
अच्छा
मगर
यार
अब
तेरी
हाँ
से
तो
दीपक
जलाने
लगे
ग़ज़लें
सुनता
रहा
रात
भर
सोच
कर
तुझको
पाने
में
मुझको
ज़माने
लगे
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