mujh ko nahin maaloom ki vo kaun hai kya hai | मुझ को नहीं मालूम कि वो कौन है क्या है

  - Badiuzzaman Khawar
मुझकोनहींमालूमकिवोकौनहैक्याहै
जोसाएकेमानिंदमिरेसाथलगाहै
इकऔरभीहैजिस्ममिरेजिस्मकेअंदर
इकऔरभीचेहरामिरेचेहरेमेंछुपाहै
महताबतोआएगासीढ़ीसेउतरकर
दीवानाकिसउम्मीदपेरस्तेमेंखड़ाहै
मिलनेकीतमन्नाहैमगरउससेमिलेंक्या
जिसशख़्सकाइसशहरमेंघरहैपताहै
लिखताहूँनईनज़्म-ओ-ग़ज़लजिसकेसबबमैं
वोज़ौक़-ए-सुख़नतोमुझेविर्सेमेंमिलाहै
मैदाँमेंचलेआओतोखुलजाएयेतुमपर
क्याशामकीसरशारहवाओंमेंमज़ाहै
सोचाथामिरेसाथचलेगाजोसफ़रमें
घरपरवोमिराख़्वाब-ए-हसींछूटगयाहै
हम'मीर'कादीवानथेक्याफ़हमपेखुलते
अख़बारसमझकरहमेंलोगोंनेपढ़ाहै
कहतेहैंकिउसशहरमेंहैधूमहमारी
देखाहैकिसीनेजहाँहमकोसुनाहै
बाहरसकोईआजतो'ख़ावर'कोपुकारे
कमरेमेंबहुतरोज़सेवोबंदपड़ाहै
  - Badiuzzaman Khawar
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