main charaagh-e-shab-e-hasti hooñ ziya kya maanguun | मैं चराग़-ए-शब-ए-हस्ती हूँ ज़िया क्या माँगूँ

  - Badar Shamsi
मैंचराग़-ए-शब-ए-हस्तीहूँज़ियाक्यामाँगूँ
ज़िंदारहनाहैतोचलनेकेसिवाक्यामाँगूँ
तोहफ़ा-ए-चाक-ए-गरेबाँकेसिवाक्यामाँगूँ
तुझसेफ़स्ल-ए-जुनूँतूहीबताक्यामाँगूँ
मैंनेचाहाहैतुझेअपनेइरादोंकीतरह
औरमैंअपनेइरादोंकासिलाक्यामाँगूँ
फूलमेंनूरनहींचाँदमेंख़ुशबूहीनहीं
इननज़ारोंसेतिराहुस्न-ए-अदाक्यामाँगूँ
कितनेआँसूहैंमिरेग़मकोसजानेकेलिए
आजकीरातसितारोंसेज़ियाक्यामाँगूँ
अपनेहीख़ूनमेंडूबाहुआपैकरहूँमैं
मैंकिसीऔरसेरंगीनक़बाक्यामाँगूँ
ज़ख़्म-ए-एहसासलहूदेतोबहारआतीहै
ग़ुंचा-ए-दिलकेलिएमौज-ए-सबाक्यामाँगूँ
मेरीक़िस्मतमेंतोशायदकोईपत्थरभीनहीं
वहशत-ए-दिलकाकिसीसेमैंसिलाक्यामाँगूँ
दिलकाहरदाग़-ए-तमन्नाहैचराग़-ए-मंज़िल
'बद्र'मैंचाँद-सितारोंसेज़ियाक्यामाँगूँ
  - Badar Shamsi
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