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Badal Raag
ghar men apni zara nahin chalti
ghar men apni zara nahin chalti | घर में अपनी ज़रा नहीं चलती
- Badal Raag
घर
में
अपनी
ज़रा
नहीं
चलती
और
किस
सेे
बयाँ
करें
सब
कुछ
- Badal Raag
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गुमान
है
या
किसी
विश्वास
में
है
सभी
अच्छे
दिनों
की
आस
में
है
ये
कैसा
जश्न
है
घर
वापसी
का
अभी
तो
राम
ही
वनवास
में
है
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Azhar Iqbal
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अजब
अंदाज़
से
ये
घर
गिरा
है
मिरा
मलबा
मिरे
ऊपर
गिरा
है
Aanis Moin
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उन
के
होने
से
बख़्त
होते
हैं
बाप
घर
के
दरख़्त
होते
हैं
Unknown
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वो
मेरे
घर
नहीं
आता
मैं
उस
के
घर
नहीं
जाता
मगर
इन
एहतियातों
से
त'अल्लुक़
मर
नहीं
जाता
Waseem Barelvi
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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नताएज
जब
सर-ए-महशर
मिलेंगे
मोहब्बत
के
अलग
नंबर
मिलेंगे
तुम्हारी
मेज़बानी
के
बहाने
कोई
दिन
हम
भी
अपने
घर
मिलेंगे
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Khurram Afaq
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सब
कुछ
तो
है
क्या
ढूँडती
रहती
हैं
निगाहें
क्या
बात
है
मैं
वक़्त
पे
घर
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
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तेरी
यादें
लिपट
जाती
हैं
मुझ
से
घर
पहुँचते
ही
कि
जैसे
बाप
से
आकर
कोई
बच्ची
लिपटती
है
Afzal Ali Afzal
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अब
के
सावन
में
शरारत
ये
मिरे
साथ
हुई
मेरा
घर
छोड़
के
कुल
शहर
में
बरसात
हुई
Gopaldas Neeraj
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जितने
मर्ज़ी
महँगे
पकवानों
को
खालो
तुम
घर
की
रोटी
तो
फिर
घर
की
रोटी
होती
है
Sarvjeet Singh
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यादों
की
वीरानी
होगी
क़स
में
झूटी
खानी
होगी
रेल
पकड़
के
जाओ
मिलने
मिलने
में
आसानी
होगी
ख़ाली
हाथ
मिलोगे
उस
सेे
फिर
तो
आनाकानी
होगी
अश्क
बहेगा
थोड़ा
भी
गर
आँखों
को
हैरानी
होगी
मुझ
सेे
मिलना
बातें
करना
तेरी
तो
मनमानी
होगी
कम
लोगों
से
मिलना-जुलना
जीने
में
आसानी
होगी
बन
जाऊँगा
जोगी
उसका
वो
जिसकी
दीवानी
होगी
दिल
देना
बादल
उसको
ही
जो
जानी
पहचानी
होगी
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Badal Raag
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नहीं
आसान
था
जीना
हमारा
कहा
करता
था
आईना
हमारा
बिछड़
के
उस
सेे
जाता
मैं
कहाँ
तक
सो
पहले
से
था
तय
पीना
हमारा
चले
थे
टूटे
दिल
का
बोझ
उट्ठा
गया
ही
टूट
यह
सीना
हमारा
उधेड़ा
ज़िस्म
अपना
भी
हमीं
ने
हमीं
ने
ओढ़ा
पश्मीना
हमारा
दी
खुशियाँ
जिसने
हमको
उम्र
भर
की
उसी
ने
चैन
भी
छीना
हमारा
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Badal Raag
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आजकल
बिन
बताए
जाती
है
प्यार
में,
बीस
पार
की
लड़की
उस
को
समझा
न
पाऊँगा
मैं
अब
वो
है
सन
दो
हज़ार
की
लड़की
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Badal Raag
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