tiri awaaz par ruke hi nahin | तिरी आवाज़ पर रुके ही नहीं

  - Babar Ali Asad
तिरीआवाज़पररुकेहीनहीं
सोकईवाक़िएहुएहीनहीं
उसनेजितनेदिएमैंलेआया
मुफ़्तकेसाँसथेगिनेहीनहीं
मो'जिज़ेवक़्तपरनहींहोते
सानेहेवक़्तदेखतेहीनहीं
झूठहैदिल-ब-दरकिएगएहैं
सचकहेंहमवहाँपेथेहीनहीं
सबहक़ीक़त-पसंदहोगएहैं
लोगअबख़्वाबदेखतेहीनहीं
जोतिरेनाममेंनहींआते
ऐसेहर्फ़ोंकोजानतेहीनहीं
रिसरहेहैंजगहजगहसे'असद'
उसनेकुछज़ख़्मतोसिएहीनहीं
  - Babar Ali Asad
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