dil men hasrat koi bachi hi nahin | दिल में हसरत कोई बची ही नहीं

  - Azm Shakri
दिलमेंहसरतकोईबचीहीनहीं
आगऐसीलगीबुझीहीनहीं
उसनेजबख़ुदकोबे-नक़ाबकिया
फिरकिसीकीनज़रउठीहीनहीं
जैसाइसबारखुलकेरोएहम
ऐसीबारिशकभीहुईहीनहीं
ज़िंदगीकोगलेलगातेक्या
ज़िंदगीउम्र-भरमिलीहीनहीं
मुंतज़िरकबसेचाँदछतपरहै
कोईखिड़कीअभीखुलीहीनहीं
मैंजिसेअपनीज़िंदगीसमझा
सचतोयेहैवोमेरीथीहीनहीं
  - Azm Shakri
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