na jaane kaisi mehroomi pas-e-raftaar chalti hai | न जाने कैसी महरूमी पस-ए-रफ़्तार चलती है

  - Aziz Nabeel
जानेकैसीमहरूमीपस-ए-रफ़्तारचलतीहै
हमेशामेरेआगेआगेइकदीवारचलतीहै
वोइकहैरतकिमैंजिसकातआक़ुबरोज़करताहूँ
वोइकवहशतमिरेहमराहजोहरबारचलतीहै
निकलकरमुझसेबाहरलौटआतीहैमिरीजानिब
मिरीदीवानगीअबसूरत-ए-परकारचलतीहै
अजबअंदाज़-ए-हम-सफ़रीहैयेभीक़ाफ़िलेवालो
हमारेदरमियाँइकआहनीदीवारचलतीहै
ग़ज़लकहनाभीअबइककार-ए-बे-मसरफ़सालगताहै
नयाकुछभीनहींहोताबसइकतकरारचलतीहै
'नबील'इसइश्क़मेंतुमजीतभीजाओतोक्याहोगा
येऐसीजीतहैपहलूमेंजिसकेहारचलतीहै
  - Aziz Nabeel
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