dhoop ke jaate hi mar jaaunga main | धूप के जाते ही मर जाऊँगा मैं

  - Aziz Nabeel
धूपकेजातेहीमरजाऊँगामैं
एकसायाहूँबिखरजाऊँगामैं
एतिबार-ए-दोस्तीकारंगहूँ
बे-यक़ीनीमेंउतरजाऊँगामैं
दिनकासाराज़हरपीकर,आजफिर
रातकेबिस्तरपेमरजाऊँगामैं
फिरकभीतुमसेमिलूँगारास्तो!
लौटकरफ़िलहालघरजाऊँगामैं
उससेमिलनेकीतलबमेंआऊँगा
औरबस,यूँँहीगुज़रजाऊँगामैं
मैंकिइल्ज़ाम-ए-मोहब्बतहूँ'नबील'
क्याख़बरकिसकिसकेसरजाऊँगामैं
  - Aziz Nabeel
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