main apne gird lakeeren bichh | मैं अपने गिर्द लकीरें बिछाए बैठा हूँ

  - Aziz Nabeel
मैंअपनेगिर्दलकीरेंबिछाएबैठाहूँ
सराए-दर्दमेंडेराजमाएबैठाहूँ
'नबील'रेतमेंसिक्केतलाशकरतेहुए
मैंअपनीपूरीजवानीगँवाएबैठाहूँ
येशहरक्याहैनिकलतानहींकोईघरसे
कईदिनोंसेतमाशालगाएबैठाहूँ
जोलोगदर्दकेगाहकहैंसामनेआएँ
हरएकघावसेपर्दाउठाएबैठाहूँ
बहुततलबथीमुझेरौशनीमेंआनेकी
सोयूँँहुआहैकिआँखेंजलाएबैठाहूँ
येदेखोचाँद,वोसूरज,वोउसतरफ़तारे
इकआसमानज़मींपरसजाएबैठाहूँ
जानेकौनसाआलमहैयेअज़ीज़-'नबील'
मैंरेगज़ारमेंकश्तीबनाएबैठाहूँ
  - Aziz Nabeel
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy