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Avtar Singh Jasser
bichhadte vaqt ham rone lage the
bichhadte vaqt ham rone lage the | बिछड़ते वक़्त हम रोने लगे थे
- Avtar Singh Jasser
बिछड़ते
वक़्त
हम
रोने
लगे
थे
मगर
फिर
भी
जुदा
होने
लगे
थे
- Avtar Singh Jasser
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सोचा
था
हमने
आज
सँवारेंगे
वक़्त
को
अब
हाथ
में
है
ज़ुल्फ़,
तो
फिर
ज़ुल्फ़
ही
सही
Prakhar Kanha
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किसे
है
वक़्त
मोहब्बत
में
दर-ब-दर
भटके
मैं
उसके
शहर
गया
था
किसी
ज़रूरत
से
Riyaz Tariq
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साल
के
आख़िरी
दिन
उसने
दिया
वक़्त
हमें
अब
तो
ये
साल
कई
साल
नहीं
गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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मुझ
में
थोड़ी
सी
जगह
भी
नहीं
नफ़रत
के
लिए
मैं
तो
हर
वक़्त
मोहब्बत
से
भरा
रहता
हूँ
Mirza Athar Zia
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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था
इंतिज़ार
मनाएँगे
मिल
के
दीवाली
न
तुम
ही
लौट
के
आए
न
वक़्त-ए-शाम
हुआ
Aanis Moin
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जैसे
तुमने
वक़्त
को
हाथ
में
रोका
हो
सच
तो
ये
है
तुम
आँखों
का
धोख़ा
हो
Tehzeeb Hafi
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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आँख
से
दूर
न
हो
दिल
से
उतर
जाएगा
वक़्त
का
क्या
है
गुज़रता
है
गुज़र
जाएगा
Ahmad Faraz
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उसे
इतना
पुकारा
जा
चुका
है
गला
सौ
ज़ख़्म
गहरे
खा
चुका
है
बहुत
इमकान
है
बारिश
का
यारों
कि
अब्र
ए
याद,
दिल
पे
छा
चुका
है
उसे
अब
क्या
पचेगा
इश्क़
'जस्सर'
कई
धोके
जो
पहले
खा
चुका
है
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Avtar Singh Jasser
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होश
मेरा
उड़ा
दीजिए
हमनशीं
मुसकुरा
दीजिए
छीन
कर
इश्क़
में
दिल
मेरा
दिल
की
क़ीमत
बढ़ा
दीजिए
ईद
में
दीद
हो
चाँद
की
रुख़
से
घूँघट
हटा
दीजिए
नक़्श-ए-निस्बत
न
बाक़ी
रहे
ख़त
मेरे
सब
जला
दीजिए
कर
ही
लूँगा
मैं
हासिल
जहाँ
आप
बस
हौसला
दीजिए
भीड़
से
रहनुमा
ने
कहा
मुझको
भी
रास्ता
दीजिए
अब
दग़ा
को
दु'आ
कीजिए
नुक़्ता
जस्सर
हटा
दीजिए
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Avtar Singh Jasser
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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मीर
तो
बस
मीर
थे
औ
मीर
सा
कोई
नहीं
हाँ
मगर
ग़ालिब
के
जैसा
भी
नहीं
दूजा
हुआ
Avtar Singh Jasser
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तू
मिला
जो
नहीं
चाँदनी
रात
में
हो
गया
दिल
हज़ीं
चाँदनी
रात
में
ढ़ूँढते-ढ़ूँढते
तुझ
को
मेरे
सनम
खो
गया
मैं
कहीं
चाँदनी
रात
में
बात
करती
है
तो
बात
करती
है
क्या
आसमाँ
से
ज़मीं
चाँदनी
रात
में
हम
अमावस
की
शब
जिस
जगह
थे
मिले
आ
गए
हम
वहीं
चाँदनी
रात
में
आरज़ू
है
यही
अब
कि
जस्सर
रहे
चाँद
पहलूनशीं
चाँदनी
रात
में
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Avtar Singh Jasser
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