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Atif khan
agar teraa mahboob rootha hua hai
agar teraa mahboob rootha hua hai | अगर तेरा महबूब रूठा हुआ है
- Atif khan
अगर
तेरा
महबूब
रूठा
हुआ
है
तो
आ
पास
मेरे
अजब
इक
दवा
है
- Atif khan
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भले
ही
जान-लेवा
हो
सियासत
को
ग़लत
कहना
मगर
फिर
भी
ये
सच
ईमान
वाले
लोग
कहते
हैं
Amaan Pathan
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कितनी
मुश्किल
के
बाद
टूटा
है
एक
रिश्ता
कभी
जो
था
ही
नहीं
Shahbaz Rizvi
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सुन
लिया
कैसे
ख़ुदा
जाने
ज़माने
भर
ने
वो
फ़साना
जो
कभी
हमने
सुनाया
भी
नहीं
Qateel Shifai
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काँटों
से
दिल
लगाओ
जो
ता-उम्र
साथ
दें
फूलों
का
क्या
जो
साँस
की
गर्मी
न
सह
सकें
Akhtar Shirani
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इतना
धीरे-धीरे
रिश्ता
ख़त्म
हुआ
बहुत
दिनों
तक
लगा
नहीं
हम
बिछड़े
हैं
Ajmal Siddiqui
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ले
साँस
भी
आहिस्ता
कि
नाज़ुक
है
बहुत
काम
आफ़ाक़
की
इस
कारगह-ए-शीशागरी
का
Meer Taqi Meer
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मैं
अपने
बाप
के
सीने
से
फूल
चुनता
हूँ
सो
जब
भी
साँस
थमी
बाग़
में
टहल
आया
Hammad Niyazi
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उस
लड़की
से
बस
अब
इतना
रिश्ता
है
मिल
जाए
तो
बात
वगैरा
करती
है
बारिश
मेरे
रब
की
ऐसी
नेमत
है
रोने
में
आसानी
पैदा
करती
है
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Tehzeeb Hafi
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लिख
दिया
था
जिल्द
पर
ईसा
का
नाम
साँस
लेने
लग
गए
औराक़
सब
Kiran K
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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है
ज़माना
बस
रही
ख़िल्क़त
नहीं
है
फ़साना
बस
रही
लज़्ज़त
नहीं
Atif khan
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पहले
जैसे
मिरे
हालात
से
डरता
हूँ
मैं
अब
मुहब्बत
की
तो
हर
बात
से
डरता
हूँ
मैं
Atif khan
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मोहब्बत
के
ख़ातिर
जो
नीलाम
हम
थे
जवानी
थी
जिस
वक़्त
बदनाम
हम
थे
गवारा
नहीं
था
उसे
नाम
सुनना
किसी
क़ब्र
पर
वो
लिखा
नाम
हम
थे
न
वो
वक़्त
लौटा
न
वो
शख़्स
लौटा
कभी
जिसकी
यादों
में
गुमनाम
हम
थे
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Atif khan
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तुम
न
जाने
मिरी
क्या
हो
इकरा
दर्द
से
मेरे
शिफ़ा
हो
इकरा
तुम
अलग
हो
हाँ
जुदा
हो
इकरा
ख़ाली
सा
एक
समा
हो
इकरा
धूप
हो
छाँव
हो
बारिश
वाली
एक
मीठी
सी
फ़ज़ा
हो
इकरा
तुम
मिरी
दोस्त
नहीं
हो
तुम
तो
मेरे
ज़ख़्मों
की
दवा
हो
इकरा
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Atif khan
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नज़रें
तो
वो
बचाता
रहा
सपनो
में
फिर
भी
आता
रहा
वो
मुझे
बस
सताता
रहा
मैं
उसे
बस
मनाता
रहा
हाल
अपना
बताता
रहा
और
उसको
हँसाता
रहा
जाम
साक़ी
पिलाता
रहा
और
ग़ज़लें
मैं
गाता
रहा
लोगों
ने
जब
मुझे
पकड़ा
तो
मुझको
दोषी
बताता
रहा
चोर
है
बोल
कर
ख़ुद
कहीं
वो
खड़ा
मुस्कुराता
रहा
फिर
सज़ा
मुझको
होने
लगी
और
वो
दिल
चुराता
रहा
चाँद
तो
वो
नहीं
था
मगर
चाँदनी
वो
बिछाता
रहा
लिखते
लिखते
कहानी
मिरी
हर
किसी
को
सुनाता
रहा
शाम
होती
रही
और
वो
दूर
आतिफ़
से
जाता
रहा
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Atif khan
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