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Atif khan
tum na jaane mirii kya ho ikra
tum na jaane mirii kya ho ikra | तुम न जाने मिरी क्या हो इकरा
- Atif khan
तुम
न
जाने
मिरी
क्या
हो
इकरा
दर्द
से
मेरे
शिफ़ा
हो
इकरा
तुम
अलग
हो
हाँ
जुदा
हो
इकरा
ख़ाली
सा
एक
समा
हो
इकरा
धूप
हो
छाँव
हो
बारिश
वाली
एक
मीठी
सी
फ़ज़ा
हो
इकरा
तुम
मिरी
दोस्त
नहीं
हो
तुम
तो
मेरे
ज़ख़्मों
की
दवा
हो
इकरा
- Atif khan
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यार
तुम
भी
कमाल
करते
हो
फिर
बुरा
मेरा
हाल
करते
हो
वक़्त
पर
ख़ुद
कभी
नहीं
मिलते
और
मुझ
से
मलाल
करते
हो
इक
तो
ग़लती
मिरी
नहीं
होती
तुम
मुझी
से
सवाल
करते
हो
कोई
खिलता
गुलाब
लगते
हो
जब
भी
गालों
को
लाल
करते
हो
ये
बताओ
ये
क़ुदरती
है
या
रोज़
इन
पर
गुलाल
करते
हो
हुस्न
भी
ठीक
है
मगर
'आतिफ'
बातें
तुम
बे-मिसाल
करते
हो
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Atif khan
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है
ज़माना
बस
रही
ख़िल्क़त
नहीं
है
फ़साना
बस
रही
लज़्ज़त
नहीं
Atif khan
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ये
भरोसा
नहीं
कर
सकते
के
वो
सच्चा
है
हाँ
मगर
यार
वो
इंसान
बड़ा
अच्छा
है
क्या
हुआ
जो
मिरा
दिल
थोड़ा
अभी
कच्चा
है
इश्क़
का
तुझ
से
इरादा
तो
मिरा
पक्का
है
ये
क़लम
उस
के
लिए
चलती
है
मेरी
'आतिफ़'
जिसने
इक
फूल
किताबों
में
छुपा
रक्खा
है
नींद
रातों
में
न
आए
तो
समझ
लेना
तुम
अब
शब-ए-हिज्र-ए-मुदाम
आएगी
ये
पक्का
है
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Atif khan
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यार
तुम
भी
कमाल
करते
हो
फिर
बुरा
मेरा
हाल
करते
हो
वक़्त
पर
ख़ुद
कभी
नहीं
मिलते
और
मुझ
से
मलाल
करते
हो
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Atif khan
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उस
इमारत
में
कहीं
पर
सीढ़ियों
के
सामने
वो
जहाँ
तन्हा
मिला
मुझ
सेे
वो
कमरा
याद
है
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