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Asif Mujtaba Farooqui
vo log jo mujh pe hañs rahen hain naro rahe hote agar meri jagah hote
vo log jo mujh pe hañs rahen hain naro rahe hote agar meri jagah hote | वो लोग जो मुझ पे हँस रहें हैं ना
- Asif Mujtaba Farooqui
वो
लोग
जो
मुझ
पे
हँस
रहें
हैं
ना
रो
रहे
होते
अगर
मेरी
जगह
होते
- Asif Mujtaba Farooqui
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल,
तो
जुस्तजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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सिर्फ़
उस
के
होंट
काग़ज़
पर
बना
देता
हूँ
मैं
ख़ुद
बना
लेती
है
होंटों
पर
हँसी
अपनी
जगह
Anwar Shaoor
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ज़िंदगी
फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता
को
पा
सकती
नहीं
मौत
ही
आती
है
ये
मंज़िल
दिखाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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हद
से
ज़्यादा
भी
प्यार
मत
करना
जी
हर
इक
पे
निसार
मत
करना
क्या
ख़बर
किस
जगह
पे
रुक
जाए
साँस
का
एतिबार
मत
करना
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Qamar Ejaz
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अपना
हर
तिनका
समेटे
किस
जगह
पर
जा
छुपे
हम
तिरी
आवाज़
की
चिड़ियों
से
घबराते
हुए
Swapnil Tiwari
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बिछड़
कर
मुझ
सेे
तुझको
क्या
मिला
है
कि
जो
कुछ
था
वो
भी
खोना
पड़ा
है
गया
था
जिस
जगह
पर
छोड़
कर
तू
उसी
रस्ते
पे
दिल
अब
भी
खड़ा
है
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ATUL SINGH
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ज़िन्दगी,
यूँँ
भी
गुज़ारी
जा
रही
है
जैसे,
कोई
जंग
हारी
जा
रही
है
जिस
जगह
पहले
से
ज़ख़्मों
के
निशां
थे
फिर
वहीं
पे
चोट
मारी
जा
रही
है
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Azm Shakri
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बनाने
को
अमाँ
मैं
भी
बना
देता
हज़ारों,
पर
बहानों
से
कहीं
ज़्यादा
मुझे
मंज़िल
थी
ये
प्यारी
Sandeep dabral 'sendy'
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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बाहर
वबा
का
खौफ़
है
अंदर
बला
की
मौत
हम
जी
रहे
हैं
मौत
के
साए
में
ज़िंदगी
Asif Mujtaba Farooqui
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मर
जाना
मुफ़्लिसी
से
गवारा
करें
ब-शौक़
कम-ज़र्फ
का
नहीं
मगर
एहसाँ
उठाइए
Asif Mujtaba Farooqui
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बड़ा
अनमोल
हूँ
सँभाल
कर
तू
रख
मुझे
मैं
तेरी
सुब्ह
नहीं
जो
रोज़
पलट
आऊँगा
Asif Mujtaba Farooqui
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तलब-ए-नींद
तो
आँखों
को
मेरी
बहुत
है
मगर
मुझे
सोने
नहीं
देते
मेरे
देखे
हुए
ख़्वाब
Asif Mujtaba Farooqui
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ज़िंदगी
बहुत
ख़ूब-सूरत
है
मगर
सलीक़ा
शर्त
है
जीने
के
लिए
Asif Mujtaba Farooqui
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