ek patthar rakh liya hai seena-e-sad-chaak par | एक पत्थर रख लिया है सीना-ए-सद-चाक पर

  - Ashu Mishra
एकपत्थररखलियाहैसीना-ए-सद-चाकपर
ज़ब्तकापहरालगायादीदा-ए-नमनाकपर
चारदिनमेंहीहक़ीक़तकीज़मींपरगिरा
चारदिनमेंभीउड़ाथाइश्क़केअफ़्लाकपर
कौनहैजिसपरनहींखुलतामिरादस्त-ए-हुनर
किसकीमिट्टीएकमुद्दतसेरखीहैचाकपर
येख़िज़ाँपेड़ोंसेपत्तेदिलसेख़ुशियाँलेगई
ज़ोरकुछभीचलपायामौसम-ए-सफ़्फ़ाकपर
सानेहेपड़तेरहेंगेसचकेरस्तेमेंहज़ार
उँगलियाँउठतीरहेंगीलहजा-ए-बेबाकपर
जोभीआयावोतिरीआँखोंकाहोकेरहगया
येभँवरअबतकखुलपाएकिसीतैराकपर
  - Ashu Mishra
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