ishq men guzre zamaane pe hañsi aati hai | इश्क़ में गुज़रे ज़माने पे हँसी आती है

  - Arvind Asar
इश्क़मेंगुज़रेज़मानेपेहँसीआतीहै
रातदिनअश्कबहानेपेहँसीआतीहै
जिनकोरोरोकेसुनातेथेकभीअपनोंको
अबवहीक़िस्सेसुनानेपेहँसीआतीहै
आजजागीरकीक़ीमतजोसमझआईतो
सारीजागीरलुटानेपेहँसीआतीहै
तेरीतस्वीरजोसीनेसेलगीरहतीथी
आजसीनेसेलगानेपेहँसीआतीहै
जिसकीसूरतकेसिवायादनहींथाकुछभी
उसकीअबयाददिलानेपेहँसीआतीहै
रोज़खातेथेक़समहमजुदाहोंगेकभी
आजउनक़समोंकेखानेपेहँसीआतीहै
जिसकीबसएकछुअनसेहीसिहरजाताथा
उसकोअबहाथलगानेपेहँसीआतीहै
हरघड़ीयादकियाकरताथामैंदिलसेजिसे
अबउसेदिलसेभुलानेपेहँसीआतीहै
ख़्वाबतोख़्वाबहैपूरेनहींहोतेहैं"असर"
ख़्वाबआँखोंमेंबसानेपेहँसीआतीहै
  - Arvind Asar
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