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A R Sahil "Aleeg"
yuñ to kehne bhar ko ishq ka saahil hooñ
yuñ to kehne bhar ko ishq ka saahil hooñ | यूँँ तो कहने भर को इश्क़ का साहिल हूँ
- A R Sahil "Aleeg"
यूँँ
तो
कहने
भर
को
इश्क़
का
साहिल
हूँ
सच
तो
यह
है
दोस्त
वफ़ा
का
प्यासा
मैं
- A R Sahil "Aleeg"
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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इतना
सच
बोल
कि
होंटों
का
तबस्सुम
न
बुझे
रौशनी
ख़त्म
न
कर
आगे
अँधेरा
होगा
Nida Fazli
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ये
तुम
भी
जानते
हो
कि
हालात
नर्म
है
कहने
को
कह
रहा
हूँ
कि
सब
ठीक
ठाक
है
shaan manral
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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तू
है
मुस्लिम
वो
पण्डित
की
बेटी
है
उस
लड़की
पर
तेरा
मरना
ठीक
नहीं
Shadab Asghar
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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ठीक
थी
उन
सेे
मुलाक़ात
मगर
ठीक
ही
थी
फ़िल्म
इतनी
नहीं
अच्छी
कि
दोबारा
देखूँ
Bhaskar Shukla
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क़ुबूल
है
जिन्हें
ग़म
भी
तेरी
ख़ुशी
के
लिए
वो
जी
रहे
हैं
हक़ीक़त
में
ज़िन्दगी
के
लिए
Nasir Kazmi
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तुम
मिरे
साथ
हो
ये
सच
तो
नहीं
है
लेकिन
मैं
अगर
झूट
न
बोलूँ
तो
अकेला
हो
जाऊँ
Ahmad Kamal Parvazi
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तितली
वो
ही
फूल
चुनेगी
जिस
पर
उसका
दिल
आए
इक
लड़की
के
पीछे
इतनी
मारामारी
ठीक
नहीं
Shubham Seth
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गुल
ही
सीने
नहीं
लगाने
हैं
हाथ
काँटों
से
भी
मिलाने
हैं
कुछ
नहीं
है
नया
कहानी
में
जितने
किरदार
हैं
पुराने
हैं
वो
हरम
हो
कि
बुत-कदा
कोई
सब
तेरे
ही
तो
आस्ताने
हैं
धूम
है
मयकशों
की
बस्ती
में
अब
भी
आबाद
बादा-ख़ाने
हैं
जंग
जारी
है
कुछ
पहाड़ों
से
मुझको
रस्ते
नए
बनाने
हैं
इन
अँधेरों
को
कौन
समझाए
हम
दियों
के
भी
कारख़ाने
हैं
मुंसिफ़-ए-हश्र
बख़्श
दे
'साहिल'
बख़्श
देने
के
सौ
बहाने
हैं
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A R Sahil "Aleeg"
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जो
ग़ज़ल
मैंने
इश्क़
की
कही
थी
उस
का
मक़्ता
कहा
किसी
और
ने
A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुद
को
पहले
ढूँढ़
लो
पहचान
लो
फिर
ख़ुद-ब-ख़ुद
तुम
को
ख़ुदा
मिल
कर
रहेगा
A R Sahil "Aleeg"
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शा'इरी
खेल
है
ख़यालों
का
और
ये
ला
के
इश्क़
देता
है
मसअला
छोड़
बहर
और
वज़्न
का
काम
साहिल
ये
कर
ही
लेता
है
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A R Sahil "Aleeg"
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शम्अ
उलफ़त
की
जले
गर
तो
बुझा
दी
जाए
इश्क़
की
दुनिया
जो
है
इस
को
जला
दी
जाए
A R Sahil "Aleeg"
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