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A R Sahil "Aleeg"
khud ko pahle Dhoondh lo pahchaan lo phir
khud ko pahle Dhoondh lo pahchaan lo phir | ख़ुद को पहले ढूँढ़ लो पहचान लो फिर
- A R Sahil "Aleeg"
ख़ुद
को
पहले
ढूँढ़
लो
पहचान
लो
फिर
ख़ुद-ब-ख़ुद
तुम
को
ख़ुदा
मिल
कर
रहेगा
- A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुदा
ऐसे
एहसास
का
नाम
है
रहे
सामने
और
दिखाई
न
दे
Bashir Badr
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हम
नहीं
वो
जो
करें
ख़ून
का
दावा
तुझ
पर
बल्कि
पूछेगा
ख़ुदा
भी
तो
मुकर
जाएँगे
Sheikh Ibrahim Zauq
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वो
बे-वफ़ा
है
तो
क्या
मत
कहो
बुरा
उसको
कि
जो
हुआ
सो
हुआ
ख़ुश
रखे
ख़ुदा
उसको
Naseer Turabi
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या
तो
भरम
बना
रहे
इतना
ख़ुदा
करे
इनकार
अपने
होने
से
वरना
ख़ुदा
करे
मुश्किल
है
मेरा
काम
तो
मिल
बाँटकर
करें
आधा
करा
दें
राम
जी
आधा
ख़ुदा
करे
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Vineet Aashna
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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तेरे
बग़ैर
ख़ुदा
की
क़सम
सुकून
नहीं
सफ़ेद
बाल
हुए
हैं
हमारा
ख़ून
नहीं
न
हम
ही
लौंडे
लपाड़ी
न
कच्ची
उम्र
का
वो
ये
सोचा
समझा
हुआ
इश्क़
है
जुनून
नहीं
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Shamim Abbas
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जो
इक
ख़ुदा
नहीं
मिलता
तो
इतना
मातम
क्यूँँ
यहाँ
तो
कोई
मिरा
हम-ज़बाँ
नहीं
मिलता
Kaifi Azmi
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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बाक़ी
न
दिल
में
कोई
भी
या
रब
हवस
रहे
चौदह
बरस
के
सिन
में
वो
लाखों
बरस
रहे
Ameer Minai
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तुम
भी
वैसे
थे
मगर
तुम
को
ख़ुदा
रहने
दिया
इस
तरह
तुम
को
ज़माने
से
जुदा
रहने
दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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काम
सारे
रब
की
मर्ज़ी
से
नहीं
होते
मगर
सब
में
पोशीदा
इजाज़त
उस
ख़ुदा
की
होती
है
A R Sahil "Aleeg"
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मलेंगे
हाथों
को
अपने
गवाह
और
सुबूत
ख़ुलूस-ओ-इश्क़
का
जब
हम
निसाब
लिक्खेंगे
A R Sahil "Aleeg"
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देख
ले
ख़ुद
तू,
हम-नज़र
न
छुपी
आरज़ू
दिल
की
चाह
कर
न
छुपी
दिल
ने
पहरे
लगाए
थे
लेकिन
उड़
गई
प्यार
की
ख़बर,
न
छुपी
मानता
हूँ
मैं,
तू
छुपा
लेगा
यह
लगी
दिल
की
भी
अगर
न
छुपी
लाख
ढाँपी
गई
थी
परदों
में
थी
सहर
की
किरन
नज़र
न
छुपी
इश्क़
में
बे-वफ़ाई
ए
पैहम
हम
छुपाया
किए
मगर
न
छुपी
वारदात
ए
शबे-सियाह,
चराग़!
थी
अयाँ
वो
दम
ए
सहर
न
छुपी
तेरी
यादों
से
नम
हुई
ऐसे
ग़मज़दा
दिल
से
चश्म
तर
न
छुपी
ये
मिरे
क़त्ल
की
ख़ता,
'साहिल'
ले
तेरे
आ
गई
है
सर,
न
छुपी
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A R Sahil "Aleeg"
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सिखा
दिया
है
कई
आँधियों
को
मैंने
सबक
मैं
इक
चिराग़
हूँ
मेरा
भी
अपना
रुतबा
है
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
मैं
हासिल
कर
सकता
था
फिर
सोचा
छोड़ो
जाने
दो
A R Sahil "Aleeg"
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