गुल ही सीने नहीं लगाने हैं

  - A R Sahil "Aleeg"
गुलहीसीनेनहींलगानेहैं
हाथकाँटोंसेभीमिलानेहैं
कुछनहींहैनयाकहानीमें
जितनेकिरदारहैंपुरानेहैं
वोहरमहोकिबुत-कदाकोई
सबतेरेहीतोआस्तानेहैं
धूमहैमयकशोंकीबस्तीमें
अबभीआबादबादा-ख़ानेहैं
जंगजारीहैकुछपहाड़ोंसे
मुझकोरस्तेनएबनानेहैं
इनअँधेरोंकोकौनसमझाए
हमदियोंकेभीकारख़ानेहैं
मुंसिफ़-ए-हश्रबख़्शदे'साहिल'
बख़्शदेनेकेसौबहानेहैं
  - A R Sahil "Aleeg"
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy