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A R Sahil "Aleeg"
mujh men meri koi dilchaspi nahin
mujh men meri koi dilchaspi nahin | मुझ में मेरी, कोई दिलचस्पी नहीं
- A R Sahil "Aleeg"
मुझ
में
मेरी,
कोई
दिलचस्पी
नहीं
जान
तो
है,
ज़िंदगी
गुम
है
कहीं
- A R Sahil "Aleeg"
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खेल
ही
तो
है
जहाँ
मैं
उसका
हूँ
ज़िन्दगी
ये
ट्वीट
बदलेगी
कभी
Neeraj Neer
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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बता
रहा
है
झटकना
तेरी
कलाई
का
ज़रा
भी
रंज
नहीं
है
तुझे
जुदाई
का
मैं
ज़िंदगी
को
खुले
दिल
से
खर्च
करता
था
हिसाब
देना
पड़ा
मुझको
पाई-पाई
का
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Azhar Faragh
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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यूँँ
ज़िंदगी
गुज़ार
रहा
हूँ
तिरे
बग़ैर
जैसे
कोई
गुनाह
किए
जा
रहा
हूँ
मैं
Jigar Moradabadi
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कुछ
दिन
से
ज़िंदगी
मुझे
पहचानती
नहीं
यूँँ
देखती
है
जैसे
मुझे
जानती
नहीं
Anjum Rehbar
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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कब्ज़ा
है
ख़ारज़ार
गज़ाला
-ए-इश्क़
का
बंजर
ज़मीं
पे
दिल
की
उगाया
भी
क्या
करें
A R Sahil "Aleeg"
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दो
जहाँ
की
कामयाबी
उन
को
मिलती
हैं
कर
ले
नफ़्स-ए-मुतमइन्ना
को
जो
भी
हासिल
A R Sahil "Aleeg"
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कश्ती-ए-इश्क़
कभी
वक़्त
के
तूफ़ाँ
में
फँसे
अपने
हालात
को
हो
जाता
है
'साहिल'
शाइर
A R Sahil "Aleeg"
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गुल
ही
सीने
नहीं
लगाने
हैं
हाथ
काँटों
से
भी
मिलाने
हैं
कुछ
नहीं
है
नया
कहानी
में
जितने
किरदार
हैं
पुराने
हैं
वो
हरम
हो
कि
बुत-कदा
कोई
सब
तेरे
ही
तो
आस्ताने
हैं
धूम
है
मयकशों
की
बस्ती
में
अब
भी
आबाद
बादा-ख़ाने
हैं
जंग
जारी
है
कुछ
पहाड़ों
से
मुझको
रस्ते
नए
बनाने
हैं
इन
अँधेरों
को
कौन
समझाए
हम
दियों
के
भी
कारख़ाने
हैं
मुंसिफ़-ए-हश्र
बख़्श
दे
'साहिल'
बख़्श
देने
के
सौ
बहाने
हैं
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A R Sahil "Aleeg"
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ज़ख़्म
मिलते
है
इश्क़
में
जो
भी
सूख
कर
भी
सुखा
नहीं
करते
A R Sahil "Aleeg"
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