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A R Sahil "Aleeg"
kabza hai khaarzaar ghazaala e-ishq ka
kabza hai khaarzaar ghazaala e-ishq ka | कब्ज़ा है ख़ारज़ार गज़ाला -ए-इश्क़ का
- A R Sahil "Aleeg"
कब्ज़ा
है
ख़ारज़ार
गज़ाला
-ए-इश्क़
का
बंजर
ज़मीं
पे
दिल
की
उगाया
भी
क्या
करें
- A R Sahil "Aleeg"
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जैसे
तू
हुक्म
करे
दिल
मिरा
वैसे
धड़के
ये
घड़ी
तेरे
इशारों
से
मिला
रक्खी
है
Anwar Masood
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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जब
ज़रा
रात
हुई
और
मह
ओ
अंजुम
आए
बार-हा
दिल
ने
ये
महसूस
किया
तुम
आए
Asad Bhopali
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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दिल
को
तेरी
चाहत
पे
भरोसा
भी
बहुत
है
और
तुझ
से
बिछड़
जाने
का
डर
भी
नहीं
जाता
Ahmad Faraz
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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आज
भी
तू
उस
ग़ज़ाला
का
ही
है
कहते
हैं
सब
लोग
हाल
मेरा
क्या
हुआ
है
इश्क़
में
सब
से
अयाँ
है
A R Sahil "Aleeg"
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तुम
मिलो
अब,
या
उम्र
भर
न
मिलो
फ़र्क़
पड़ता
था,अब
नहीं
पड़ता
A R Sahil "Aleeg"
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यही
तौर-ए-ज़िंदगी
है,
मैं
दर्दो-ग़म
ज़ख़्म
अपने
दिखाता
सारे
जहाँ
को
हूँ
पर
अपनों
को
नहीं
मैं
A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुदा
और
इबलीस
के
ही
झड़प
का
है
हासिल
ये
दुनिया,
ये
आदम,
ये
हव्वा,
ये
जन्नत,
जहन्नम
A R Sahil "Aleeg"
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तुझ
से
मिलने
की
तमन्ना
तो
नहीं
लेकिन
करूँँ
क्या
घर
के
रस्ते
में
मुज़फ़्फ़रपुर
भी
आ
जाता
है
यारों
A R Sahil "Aleeg"
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