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A R Sahil "Aleeg"
muaafi maa ne maangi thii ki thii jo be-wafaai us ghazala ne
muaafi maa ne maangi thii ki thii jo be-wafaai us ghazala ne | मु'आफ़ी माँ ने माँगी थी की थी जो बे-वफ़ाई उस ग़ज़ाला ने
- A R Sahil "Aleeg"
मु'आफ़ी
माँ
ने
माँगी
थी
की
थी
जो
बे-वफ़ाई
उस
ग़ज़ाला
ने
सवाली
माँ
थी
करता
क्या
मु'आफ़ी
दे
दी
हमने
भी
ग़ज़ाला
को
- A R Sahil "Aleeg"
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ग़ुस्से
में
भींच
लेता
है
बाँहों
में
अपनी
वो
क्या
सोचना
है
फिर
उसे
ग़ुस्सा
दिलाइए
Pooja Bhatia
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तिरी
ही
तरह
से
तुझको
रुलाए
है
बद्दुआ
तिरा
दिल
टूट
जाए
Parul Singh "Noor"
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एक
ग़लत-फ़हमी
ने
ज़िंदा
रक्खा
है
शे'र
मेरे
वो
चुपके
चुपके
पढ़ती
है
Tanoj Dadhich
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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रंजिश
ही
सही
दिल
ही
दुखाने
के
लिए
आ
आ
फिर
से
मुझे
छोड़
के
जाने
के
लिए
आ
Ahmad Faraz
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हर
एक
चौखट
खुली
हुई
थी
हर
इक
दरीचा
खुला
हुआ
था
कि
उसकी
आमद
पे
दर
यहाँ
तक
कि
बेघरों
का
खुला
हुआ
था
ये
तेरी
हम्म
ने
हमें
ही
उलझन
में
डाल
रक्खा
है
वरना
हम
पर
तमाम
साइंस
के
फ़लसफ़ों
का
हर
एक
चिट्ठा
खुला
हुआ
था
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Saad Ahmad
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ले
लो
बोसा
अपना
वापस
किस
लिए
तकरार
की
क्या
कोई
जागीर
हम
ने
छीन
ली
सरकार
की
Akbar Merathi
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भोले
बन
कर
हाल
न
पूछ
बहते
हैं
अश्क
तो
बहने
दो
जिस
से
बढ़े
बेचैनी
दिल
की
ऐसी
तसल्ली
रहने
दो
Arzoo Lakhnavi
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जो
ग़ुस्सा
आ
गया
तो
क्या
ही
कर
लेंगे
ज़ुबाँ
ये
मेरी
गाली
भी
नहीं
देती
Irshad Siddique "Shibu"
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मेरी
बेचैनी
का
आलम
मेरी
बेचैनी
से
पूछो
मेरे
चहरे
से
पूछोगे
कहेगा
ठीक
है
सब
कुछ
Aqib khan
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इश्क़
का
नाम-ओ-नसब
याद
आया
सब
जो
भूला
था
मैं
अब
याद
आया
हम
ने
समझा
था
बहार-ए-ग़म
है
वो
तेरी
याद
थी
अब
याद
आया
इश्क़
के
नाम
बहुत
रोए
हम
हादिसा
हम
को
अजब
याद
आया
बद-ज़बानी
में
कटी
उम्र-ए-रवाँ
आख़िरी
वक़्त
अदब
याद
आया
ले
गया
मुझको
भी
कर्बल
की
तरफ़
तिश्ना-लब
मुझको
वो
जब
याद
आया
मैं
जिसे
सोचा
किया
देर
तलक
बे-वफ़ा
इश्क़
था
अब
याद
आया
हिज्र
में
मौत
न
आई
मुझको
इतने
तड़पे
हैं
कि
रब
याद
आया
आप
किस
बात
पे
रोए
'साहिल'
क्या
कोई
नग़्में
तरब
याद
आया
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A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुद
ब
ख़ुद
बुझ
जाएँगे
ज़ुल्म-ओ-सितम
के
सब
दिए
सब
जलाएँ
गर
जो
इंसाफ़-
ओ-
अदल
का
इक
दिया
A R Sahil "Aleeg"
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लोग
लोगों
का
ख़ून
पीते
हैं
हमने
सिगरेट
पी
तो
हंगामा
A R Sahil "Aleeg"
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कौन
रहता
है
मकान-ए
-इश्क़
में
बतलाए
कोई
बे-वफ़ाई
दर्द
ज़िल्लत
टीस
हसरत
या
कि
वहशत
A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुद-कुशी
कैसे
करूँँ
पूछा
जो
उसने
कह
दिया
जाओ,
किसी
से
इश्क़
कर
लो
A R Sahil "Aleeg"
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