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A R Sahil "Aleeg"
kaun rehta hai makaan-e ishq men batlaaye koi
kaun rehta hai makaan-e ishq men batlaaye koi | कौन रहता है मकान-ए -इश्क़ में बतलाए कोई
- A R Sahil "Aleeg"
कौन
रहता
है
मकान-ए
-इश्क़
में
बतलाए
कोई
बे-वफ़ाई
दर्द
ज़िल्लत
टीस
हसरत
या
कि
वहशत
- A R Sahil "Aleeg"
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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फ़ुर्सत
नहीं
मुझे
कि
करूँँ
इश्क़
फिर
से
अब
माज़ी
की
चोटों
से
अभी
उभरा
नहीं
हूँ
मैं
डर
है
कहीं
ये
ऐब
उसे
रुस्वा
कर
न
दे
सो
ग़म
में
भी
शराब
को
छूता
नहीं
हूँ
मैं
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Harsh saxena
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बिना
इस
इश्क़
के
कैसे
गुज़ारा
हो
ज़रूरी
है
कि
हो
ये
इश्क़
दोबारा
Abhay Aadiv
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कुछ
न
मैं
समझा
जुनून
ओ
इश्क़
में
देर
नासेह
मुझ
को
समझाता
रहा
Meer Taqi Meer
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इश्क़
करना
इक
सज़ा
है
क्या
करें
इश्क़
का
अपना
मज़ा
है
क्या
करें
Syed Naved Imam
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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कब
तुम्हें
इश्क़
पे
मजबूर
किया
है
हमने
हम
तो
बस
याद
दिलाते
हैं
चले
जाते
हैं
Abbas Tabish
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इश्क़
तू
ने
बड़ा
नुक़सान
किया
है
मेरा
मैं
तो
उस
शख़्स
से
नफ़रत
भी
नहीं
कर
सकता
Liaqat Jafri
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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ये
यक़ीं
है
की
मेरी
उल्फ़त
का
होगा
उन
पर
असर
कभी
न
कभी
Anwar Taban
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ज़ुल्म
माशूक़ा
के
सहो
हँस
कर
इश्क़
का
सदक़ा
और
ज़कात
है
ये
A R Sahil "Aleeg"
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रह
रह
कर
अश्कों
का
चश्मा
इश्क़
के
ज़ख़्मों
को
धोता
है
A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुदा
तेरे
वजूद
से
इनकार
नहीं
है
मुझको
मगर
सवाल
तो
तेरे
इंसाफ-परस्त
का
है
A R Sahil "Aleeg"
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ना-मुकम्मल
इश्क़
जिनका
ज़िंदगानी
में
है
मुकम्मल
इश्क़
उनका
हर
कहानी
में
बे-वफ़ा
को
बे-वफ़ा
कहते
नहीं
लेकिन
इश्क़
करने
का
है
मातम
ज़ीस्त-ए-फ़ानी
में
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A R Sahil "Aleeg"
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हिक़ारत,से
क्यूँ
देखते
हो,
तवाइफ़
को
भी
बख़्श
इज़्ज़त
हवस-आश्ना
मर्द
का
वो
ग़लाज़त
उठाती
है
साहब
A R Sahil "Aleeg"
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