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A R Sahil "Aleeg"
log jeete hain yahaañ jeene ki KHaatir
log jeete hain yahaañ jeene ki KHaatir | लोग जीते हैं यहाँ जीने की ख़ातिर
- A R Sahil "Aleeg"
लोग
जीते
हैं
यहाँ
जीने
की
ख़ातिर
जी
रहा
हूँ
मैं
फ़क़त
मरने
को
साहिल
- A R Sahil "Aleeg"
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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ज़िक्र
तबस्सुम
का
आते
ही
लगते
हैं
इतराने
लोग
और
ज़रा
सी
ठेस
लगी
तो
जा
पहुँचे
मयख़ाने
लोग
Ateeq Allahabadi
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सारे
ग़म
भूल
गए
आपके
रोने
पे
मुझे
किसको
ठंडक
में
पसीने
का
ख़्याल
आता
है
आखरी
उम्र
में
जाते
है
मदीने
हम
लोग
मरने
लगते
है
तो
जीने
का
ख़याल
आता
है
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Nadir Ariz
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ठहाका
मार
कर
हथियार
हँसते
नहीं
जीतेंगे
अब
इंसान
हम
सेे
Umesh Maurya
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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वो
आदमी
नहीं
है
मुकम्मल
बयान
है
माथे
पे
उस
के
चोट
का
गहरा
निशान
है
वो
कर
रहे
हैं
इश्क़
पे
संजीदा
गुफ़्तुगू
मैं
क्या
बताऊँ
मेरा
कहीं
और
ध्यान
है
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Dushyant Kumar
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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इश्क़
क़ैस
फ़रहाद
रोमियो
जैसे
ही
कर
सकते
हैं
हम
तो
ठहरे
दस
से
छह
तक
ऑफ़िस
जाने
वाले
लोग
Vashu Pandey
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रो
रहा
है
बशर
मगर
देखो
ज़िन्दगी
को
रफ़ू
नहीं
करता
Tarun Pandey
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हर
आदमी
में
होते
हैं
दस
बीस
आदमी
जिस
को
भी
देखना
हो
कई
बार
देखना
Nida Fazli
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इश्क़
हो
गर
बा-वफ़ा
तो
फिर
है
सब
मुमकिन
यहाँ
इश्क़
हो
गर
बे-वफ़ा
तो
कुछ
भी
फिर
मुमकिन
नहीं
A R Sahil "Aleeg"
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नस्ब-उल-एन
आपका
मर
जाए
जब,
फिर
दिल
में
उगता
है
तअस्सुब
का
ये
पौधा
A R Sahil "Aleeg"
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अना
से
माँगू,
जहाँ
से
माँगू,
तुझे
मैं
किस-किस
ख़ुदास
माँगू
बनी
है
मेरे
ही
जान-ओ-जी
की
तू
सख़्त
आफ़त,
मेरी
ग़ज़ाला
A R Sahil "Aleeg"
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खेलना
जज़्बातों
से
आता
नहीं
है
इसलिए
तो
हूँ,
जहाँ
भर
में
अकेला
A R Sahil "Aleeg"
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तीन
चीजें
मेरी
किस्मत
में
नहीं
हैं
अर्ज़,
शोहरत
और
किसी
की
भी
मुहब्बत
A R Sahil "Aleeg"
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