hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
A R Sahil "Aleeg"
khelna jazbaaton se aata nahin hai
khelna jazbaaton se aata nahin hai | खेलना जज़्बातों से आता नहीं है
- A R Sahil "Aleeg"
खेलना
जज़्बातों
से
आता
नहीं
है
इसलिए
तो
हूँ,
जहाँ
भर
में
अकेला
- A R Sahil "Aleeg"
Download Sher Image
यार
इस
में
तो
मज़ा
है
ही
नहीं
कोई
भी
हम
सेे
ख़फ़ा
है
ही
नहीं
इश्क़
ही
इश्क़
है
महसूस
करो
और
कुछ
इसके
सिवा
है
ही
नहीं
Read Full
Madhyam Saxena
Send
Download Image
45 Likes
मुझको
उसकी
नज़रे
अपने
चेहरे
पर
महसूस
हुई
इसका
मतलब
उसने
मेरी
तस्वीरो
को
देखा
हैं
Vishal Bagh
Send
Download Image
45 Likes
बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
बस
मोहब्बत
जान-ए-
मन
बाक़ी
सब
जज़्बात
का
इज़हार
कम
कर
दीजिए
Farhat Ehsaas
Send
Download Image
52 Likes
रोज़
मिलने
पे
भी
लगता
था
कि
जुग
बीत
गए
इश्क़
में
वक़्त
का
एहसास
नहीं
रहता
है
Ahmad Mushtaq
Send
Download Image
22 Likes
ख़ुदा
ऐसे
एहसास
का
नाम
है
रहे
सामने
और
दिखाई
न
दे
Bashir Badr
Send
Download Image
39 Likes
ऐ
जज़्बा-ए-दिल
गर
मैं
चाहूँ
हर
चीज़
मुक़ाबिल
आ
जाए
मंज़िल
के
लिए
दो
गाम
चलूँ
और
सामने
मंज़िल
आ
जाए
Behzad Lakhnavi
Send
Download Image
20 Likes
जज़्बातों
को
सहज
लफ्ज़ों
में
पिरोता
हूँ
मैं
लिखता
फ़क़त
वही
हूँ
जो
सच
में
होता
हूँ
मैं
Harsh saxena
Send
Download Image
5 Likes
तुम
ने
किस
कैफ़ियत
में
मुख़ातब
किया
कैफ़
देता
रहा
लफ़्ज़-ए-'तू'
देर
तक
Ambreen Haseeb Ambar
Send
Download Image
23 Likes
लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
Send
Download Image
51 Likes
ग़म
और
ख़ुशी
में
फ़र्क़
न
महसूस
हो
जहाँ
मैं
दिल
को
उस
मक़ाम
पे
लाता
चला
गया
Sahir Ludhianvi
Send
Download Image
76 Likes
Read More
बेवफ़ाओं
ने
कर
दिया
जितना
इश्क़
इतना
बुरा
नहीं
होता
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
0 Likes
वो
गिरफ़्तार
जो
करे
तो
फिर
गेसुओं
के
क़फ़स
में
मर
जाए
ये
तमन्ना
है
एक
'आशिक़
की
इश्क़
की
दस्तरस
में
मर
जाए
Read Full
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
0 Likes
गुल
ही
सीने
नहीं
लगाने
हैं
हाथ
काँटों
से
भी
मिलाने
हैं
कुछ
नहीं
है
नया
कहानी
में
जितने
किरदार
हैं
पुराने
हैं
वो
हरम
हो
कि
बुत-कदा
कोई
सब
तेरे
ही
तो
आस्ताने
हैं
धूम
है
मयकशों
की
बस्ती
में
अब
भी
आबाद
बादा-ख़ाने
हैं
जंग
जारी
है
कुछ
पहाड़ों
से
मुझको
रस्ते
नए
बनाने
हैं
इन
अँधेरों
को
कौन
समझाए
हम
दियों
के
भी
कारख़ाने
हैं
मुंसिफ़-ए-हश्र
बख़्श
दे
'साहिल'
बख़्श
देने
के
सौ
बहाने
हैं
Read Full
A R Sahil "Aleeg"
Download Image
0 Likes
सुना
है
तुम
को
शिकायत
बहुत
है
मेरी
क़लम
से
न
तुम
बोलो
झूठ
कोई,
लिखूँगा
सच
मैं
न
कोई
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
1 Like
मुंतज़िर
हूँ
सदा-ए-कुन
का
मैं
और
यही
इक
सदा
नहीं
आती
A R Sahil "Aleeg"
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Haalaat Shayari
Jawani Shayari
Gham Shayari
Propose Shayari
Bimar Shayari