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A R Sahil "Aleeg"
karam kuchh to teri jafa ka hai kuchh ishq ka bhi
karam kuchh to teri jafa ka hai kuchh ishq ka bhi | करम कुछ तो तेरी जफ़ा का है कुछ इश्क़ का भी
- A R Sahil "Aleeg"
करम
कुछ
तो
तेरी
जफ़ा
का
है
कुछ
इश्क़
का
भी
बुरा
था
नहीं
मैं
मगर
बन
गया
हूँ
बुरा
मैं
- A R Sahil "Aleeg"
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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तबक़ों
में
रंग-ओ-नस्ल
के
उलझा
के
रख
दिया
ये
ज़ुल्म
आदमी
ने
किया
आदमी
के
साथ
Bakhtiyar Ziya
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ख़ून
से
सींची
है
मैं
ने
जो
ज़मीं
मर
मर
के
वो
ज़मीं
एक
सितम-गर
ने
कहा
उस
की
है
Javed Akhtar
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ये
तो
बढ़ती
ही
चली
जाती
है
मीआद-ए-सितम
ज़ुज़
हरीफ़ान-ए-सितम
किस
को
पुकारा
जाए
वक़्त
ने
एक
ही
नुक्ता
तो
किया
है
तालीम
हाकिम-ए-वक़त
को
मसनद
से
उतारा
जाए
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Jaun Elia
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दुश्मनों
की
जफ़ा
का
ख़ौफ़
नहीं
दोस्तों
की
वफ़ा
से
डरते
हैं
Hafeez Banarasi
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छोड़
कर
जाने
का
मंज़र
याद
है
हर
सितम
तेरा
सितमगर
याद
है
अपना
बचपन
भूल
बैठा
हूँ
मगर
अब
भी
तेरा
रोल
नंबर
याद
है
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Salman Zafar
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ज़ुल्म
फिर
ज़ुल्म
है
बढ़ता
है
तो
मिट
जाता
है
ख़ून
फिर
ख़ून
है
टपकेगा
तो
जम
जाएगा
Sahir Ludhianvi
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डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
Subhan Asad
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शे'र
हो,
नज़्म
हो
या
कोई
ग़ज़ल,
मैं
नहीं
कहता
क़ैद
करता
हूँ
दर्द-ओ-ग़म
और
हसीं
पल
को
काग़ज़
पर
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
की
इंतिहा
ही
तो
है
ये
चाय
पिलवा
रहा
हूँ
क़ातिल
को
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
के
दर
पे
आने
वाले
लोग
रह
न
पाए
किसी
ठिकाने
के
A R Sahil "Aleeg"
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रूठने
और
मनाने
का
हुनर
भूल
गया
इश्क़
को
अपना
बनाने
का
हुनर
भूल
गया
A R Sahil "Aleeg"
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उम्र
भर
इश्क़
किया
हमने
तो
इतना
जाना
इश्क़
अलफ़ाज़
की
इक
भूल-भुलय्या
है
बस
A R Sahil "Aleeg"
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