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A R Sahil "Aleeg"
kab aur kahaan khilaaye hain gul us ne kya kahein
kab aur kahaan khilaaye hain gul us ne kya kahein | कब और कहाँ खिलाए हैं गुल उस ने क्या कहें
- A R Sahil "Aleeg"
कब
और
कहाँ
खिलाए
हैं
गुल
उस
ने
क्या
कहें
सब
जानते
है
हम,
सो
फ़साना
ये
क्या
कहें
कर
के
जफ़ा
वो
ग़ैर
की
दुल्हन
गई
है
बन
ज़ुल्मो-सितम
तमाम
सहे
हम
ने
क्या
कहें
- A R Sahil "Aleeg"
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ज़ुल्म
फिर
ज़ुल्म
है
बढ़ता
है
तो
मिट
जाता
है
ख़ून
फिर
ख़ून
है
टपकेगा
तो
जम
जाएगा
Sahir Ludhianvi
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सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
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Baghi Vikas
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तुम्हें
जफ़ा
से
न
यूँँ
बाज़
आना
चाहिए
था
अभी
कुछ
और
मिरा
दिल
दुखाना
चाहिए
था
Pirzada Qasim
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डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
Subhan Asad
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जाने
क्या
क्या
ज़ुल्म
परिंदे
देख
के
आते
हैं
शाम
ढले
पेड़ों
पर
मर्सिया-ख़्वानी
होती
है
Afzal Khan
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दुश्मनों
की
जफ़ा
का
ख़ौफ़
नहीं
दोस्तों
की
वफ़ा
से
डरते
हैं
Hafeez Banarasi
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वफ़ाओं
के
बदले
जफ़ा
कर
रहे
हैं
मैं
क्या
कर
रहा
हूँ
वो
क्या
कर
रहे
हैं
Behzad Lakhnavi
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क्या
सितम
है,
लोग
मेरे
दुख
में
भी
बस
फाइलातुन
वाइलातुन
देखते
है
Saad Ahmad
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क्या
सितम
करते
हैं
मिट्टी
के
खिलौने
वाले
राम
को
रक्खे
हुए
बैठे
हैं
रावण
के
क़रीब
Asghar Mehdi Hosh
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सितम
भी
मुझ
पे
वो
करता
रहा
करम
की
तरह
वो
मेहरबाँ
तो
न
था
मेहरबान
जैसा
था
Anwar Taban
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इश्क़
में
कुछ
रंज
में
कुछ
फ़िक्र
में,
ज़िंदगी
इन
हादिसों
में
कट
रही
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
का
नाम-ओ-नसब
याद
आया
सब
जो
भूला
था
मैं
अब
याद
आया
हम
ने
समझा
था
बहार-ए-ग़म
है
वो
तेरी
याद
थी
अब
याद
आया
इश्क़
के
नाम
बहुत
रोए
हम
हादिसा
हम
को
अजब
याद
आया
बद-ज़बानी
में
कटी
उम्र-ए-रवाँ
आख़िरी
वक़्त
अदब
याद
आया
ले
गया
मुझको
भी
कर्बल
की
तरफ़
तिश्ना-लब
मुझको
वो
जब
याद
आया
मैं
जिसे
सोचा
किया
देर
तलक
बे-वफ़ा
इश्क़
था
अब
याद
आया
हिज्र
में
मौत
न
आई
मुझको
इतने
तड़पे
हैं
कि
रब
याद
आया
आप
किस
बात
पे
रोए
'साहिल'
क्या
कोई
नग़्में
तरब
याद
आया
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A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
की
डिश
ही
है
कुछ
ऐसी
सब
खा
कर
बीमार
हुए
हैं
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
इक
बार
रूठ
जाए
जब
जान
दे
कर
भी
तो
नहीं
मनता
A R Sahil "Aleeg"
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मेरी
क़ीमत
लगा
रहा
है
वो
कौड़ियौं
में
जिसे
ख़रीदा
था
A R Sahil "Aleeg"
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