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A R Sahil "Aleeg"
ishq ka sirf ye hi hai haasil
ishq ka sirf ye hi hai haasil | इश्क़ का सिर्फ़ ये ही है हासिल
- A R Sahil "Aleeg"
इश्क़
का
सिर्फ़
ये
ही
है
हासिल
लाख
इल्ज़ाम
चार
अफ़साने
- A R Sahil "Aleeg"
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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इक
और
इश्क़
की
नहीं
फुर्सत
मुझे
सनम
और
हो
भी
अब
अगर
तो
मेरा
मन
नहीं
बचा
Afzal Ali Afzal
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कोई
तो
पूछे
मोहब्बत
के
इन
फ़रिश्तों
से
वफ़ा
का
शौक़
ये
बिस्तर
पे
क्यूँ
उतर
आया
Harsh saxena
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मोहब्बत
में
नहीं
है
फ़र्क़
जीने
और
मरने
का
उसी
को
देख
कर
जीते
हैं
जिस
काफ़िर
पे
दम
निकले
Mirza Ghalib
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दिल
में
जो
मोहब्बत
की
रौशनी
नहीं
होती
इतनी
ख़ूब-सूरत
ये
ज़िंदगी
नहीं
होती
Hastimal Hasti
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नई
नस्लें
समझ
पाएँ
मुहब्बत
के
मआनी
हमें
इस
वास्ते
भी
शा'इरी
करनी
पड़ेगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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दूजा
इश्क़
किया
तो
ये
मालूम
हुआ
पहले
वाले
में
भी
ग़लती
मेरी
थी
Tanoj Dadhich
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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छोड़ो
दुनिया
की
परवाहें,
करो
मोहब्बत
मुश्किल
हों
कितनी
भी
राहें,
करो
मोहब्बत
सुनकर
देखो
सारे
मंदिर
यही
कहेंगे
यही
कहेंगी
सब
दरगाहें,
करो
मोहब्बत
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Bhaskar Shukla
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बे-वफ़ाई
-ए-
ग़ज़ाला
ने
सिखाया
ये
सबक़
इश्क़
में
दो
जिस्म
और
इक
जाँ
की
बातें
झूठ
है
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
के
दर
प,
आने
वाले
लोग
रह
न
पाए,
किसी
ठिकाने
के
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
ओ
वफ़ा
के
सारे
वरक़
भूल
गए
हैं
हम
पर
किसी
का
कितना
था
हक़
भूल
गए
हैं
ऐ
मौत
इक
सिवाए
तेरे
याद
नहीं
कुछ
जितने
पढ़े
थे
सारे
सबक़
भूल
गए
हैं
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A R Sahil "Aleeg"
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मुझे
मिला
जो
किसी
बे-वफ़ा
ग़ज़ाला
से
वो
दर्द
वक़्त
से
भी
तर्जुमा
न
होगा
कभी
A R Sahil "Aleeg"
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हुआ
करती
थी
मेरी
ईद
जिसके
दीद
से
साहिल
उतर
आया
है
देखो
चाँद
वो
ग़ैरों
के
आँगन
में
A R Sahil "Aleeg"
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