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A R Sahil "Aleeg"
dard jab ishq ka ham sunaane lage
dard jab ishq ka ham sunaane lage | दर्द जब इश्क़ का हम सुनाने लगे
- A R Sahil "Aleeg"
दर्द
जब
इश्क़
का
हम
सुनाने
लगे
उन
को
हर
बात
में
सौ
फ़साने
लगे
- A R Sahil "Aleeg"
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अश्क़-ओ-ख़ून
घुलते
हैं
तब
दीदा-ए-तर
बनती
है
दास्तान
इश्क़
में
मरने
से
अमर
बनती
है
Jaani Lakhnavi
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इश्क़
करना
इक
सज़ा
है
क्या
करें
इश्क़
का
अपना
मज़ा
है
क्या
करें
Syed Naved Imam
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अच्छी
लड़की
ज़िद
नहीं
करते
देखो
इश्क़
बुरा
होता
है
Ali Zaryoun
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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इश्क़
में
जी
को
सब्र
ओ
ताब
कहाँ
उस
से
आँखें
लड़ीं
तो
ख़्वाब
कहाँ
Meer Taqi Meer
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मैं
कैसे
मान
लूँ
कि
इश्क़
बस
इक
बार
होता
है
तुझे
जितनी
दफ़ा
देखूँ
मुझे
हर
बार
होता
है
तुझे
पाने
की
हसरत
और
डर
ना-कामियाबी
का
इन्हीं
दो
तीन
बातों
से
ये
दिल
दो
चार
होता
है
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Bhaskar Shukla
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दुकानें
नफ़रतों
की
ख़ूब
आसानी
से
चलती
हैं
अजब
दुनिया
है
जाने
इश्क़
क्यूँ
करने
नहीं
देती
Bhaskar Shukla
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एक
दरवेश
को
तिरी
ख़ातिर
सारी
बस्ती
से
इश्क़
हो
गया
है
Ammar Iqbal
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नई
दुनिया
बनाऊँगा
मगर
मैं
अपनी
दुनिया
का
ख़ुदा
भी
इश्क़
में
खोया
हुआ
लड़का
बनाऊँगा
Satya Prakash Soni
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तेरे
वादे
से
प्यार
है
लेकिन
अपनी
उम्मीद
से
नफ़रत
है
पहली
ग़लती
तो
इश्क़
करना
थी
शा'इरी
दूसरी
हिमाक़त
है
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Mehshar Afridi
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जब
कहे
हुस्न
ग़ज़ल
और
रखे
इश्क़
रदीफ़
क़ाफ़िया
जितने
है
अल्लाह
से
सब
माँगे
पनाह
A R Sahil "Aleeg"
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शोर
है
सारे
मह-जबीनों
में
इक
नगीना
है
सौ
नगीनों
में
वो
शराफ़त
का
एक
पुतला
है
हाँ
मगर
साथ
के
कमीनों
में
सब
ने
मतलब
की
खींच
कर
सरहद
बाँट
दी
है
ज़मीं
ज़मीनों
में
मोड़
कर
मुँह
गया
जो
ये
दरिया
आग
दे
दी
गई
सफ़ीनों
में
अब
दिमाग़ों
में
ऐसे
है
नफ़रत
गोलियाँ
जैसे
मैगज़ीनों
में
मुझ
को
ख़तरा
तो
पैरहन
से
है
साँप
बैठे
है
आस्तीनों
में
हम
को
बस
शा'इरी
से
है
मतलब
आप
रहिएगा
नामचीनों
में
देखिए
दिल
दिमाग़
और
ये
इश्क़
जंग
जारी
है
कब
से
तीनों
में
खोटे
सिक्के
हैं
हम
बता
साहिल
कौन
रक्खेगा
अब
ख़ज़ीनों
में
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A R Sahil "Aleeg"
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ऐ
इश्क़
तेरी
वीरानी
पर
दिन
रात
यहाँ
दिल
रोता
है
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
में
मुझ
को
मिली
जो
बे-
वफ़ाई
अस्ल
में
ये
तो
सज़ा
सच
कहने
की
है
A R Sahil "Aleeg"
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जहाँ
के
इल्ज़ाम
का
क्या
बुरा
मानूँ
लगाए
इल्ज़ाम
अपनों
ने
भी
मुझ
पर
A R Sahil "Aleeg"
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