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A R Sahil "Aleeg"
chahe de do talaq ishq ko tum
chahe de do talaq ishq ko tum | चाहे दे दो तलाक़ इश्क़ को तुम
- A R Sahil "Aleeg"
चाहे
दे
दो
तलाक़
इश्क़
को
तुम
है
जो
में'यार-
ए-
इश्क़
मत
बदलो
- A R Sahil "Aleeg"
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जब
चाहें
सो
जाते
थे
हम,
तुम
सेे
बातें
करके
तब
उल्टी
गिनती
गिनने
से
भी
नींद
नहीं
आती
है
अब
इश्क़
मुहब्बत
पर
ग़ालिब
के
शे'र
सुनाए
उसको
जब
पहले
थोड़ा
शरमाई
वो
फिर
बोली
इसका
मतलब?
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Tanoj Dadhich
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मैं
चाहता
हूँ
मोहब्बत
मेरा
वो
हाल
करे
कि
ख़्वाब
में
भी
दोबारा
कभी
मजाल
न
हो
Jawwad Sheikh
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ख़ुद-कुशी
जुर्म
भी
है
सब्र
की
तौहीन
भी
है
इस
लिए
इश्क़
में
मर
मर
के
जिया
जाता
है
Ibrat Siddiqui
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मैं
क़िस्सा
मुख़्तसर
कर
के,
ज़रा
नीची
नज़र
कर
के
ये
कहता
हूँ
अभी
तुम
से,
मोहब्बत
हो
गई
तुम
से
Zubair Ali Tabish
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सँभलने
के
लिए
कर
ली
मुहब्बत
मगर
इस
में
फिसलना
चाहिए
था
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Divy Kamaldhwaj
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तुम्हीं
से
प्यार
मुझको
इसलिए
है
ज़माना
आज़मा
कर
आ
गया
हूँ
Divy Kamaldhwaj
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दीवार
है
दुनिया
इसे
राहों
से
हटा
दे
हर
रस्म-ए-मोहब्बत
को
मिटाने
के
लिए
आ
Hasrat Jaipuri
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यूँँ
तो
रुस्वाई
ज़हर
है
लेकिन
इश्क़
में
जान
इसी
से
पड़ती
है
Fahmi Badayuni
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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भुला
पाना
बहुत
मुश्किल
है
सब
कुछ
याद
रहता
है
मोहब्बत
करने
वाला
इस
लिए
बर्बाद
रहता
है
Munawwar Rana
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मैं
लड़की
नहीं
हूँ
मैं
साहिल
हूँ
समझे
न
बोलूँ
तो
मतलब
न
ही
है
हाँ
तो
हाँ
A R Sahil "Aleeg"
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ज़िंदगी
में
तो
है
लाफ़ानी,
फ़क़त
तीन
चीज़
तल्ख़
माज़ी,
ख़ौफ़े-मुस्तक़बिल
या
कोई
क़ुनूत
A R Sahil "Aleeg"
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फेंक
कर
उस
पे
पत्थर
जफा़
के
कई
इश्क़
का
इक
परिंदा
गिराया
गया
A R Sahil "Aleeg"
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आँसू
ज़िल्लत
तोहमत
वो
सेत
ख़ल्वत
लाचारी
यानी
इश्क़
के
इक
दो
तीर
नुकीले
बाक़ी
ठीक
A R Sahil "Aleeg"
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तेरा
जलवा
जो
आम
हो
जाए
आदमी
बे-लगाम
हो
जाए
इतनी
जचती
नहीं
है
ख़ामोशी
कुछ
न
कुछ
तो
कलाम
हो
जाए
तेग़
हो
जाए
रूह
मेरी
भी
हम
सफ़र
जो
नियाम
हो
जाए
तू
अगर
पूछ
ले
हमारा
हाल
दर्द
दिल
का
तमाम
हो
जाए
सारी
दुनिया
ग़ुलाम
हो
उसकी
वो
जो
तेरा
ग़ुलाम
हो
जाए
हासिल-ए-इश्क़
ही
जफ़ा
है
तो
इश्क़
मुझ
पर
हराम
हो
जाए
होगी
ज़ाए'
सभी
नमाज़-ए-इश्क़
हुस्न
ही
जब
इमाम
हो
जाए
इश्क़
में
बे-वफ़ाई
हो
न
मुआ'फ़
आह
ये
ख़ास-ओ-आम
हो
जाए
आख़िरी
रास्ता
है
तर्क-ए-इश्क़
आख़िरी
इक
सलाम
हो
जाए
चैन
मिल
जाए
कुछ
घड़ी
साहिल
सुब्ह-ए-ग़म
की
जो
शाम
हो
जाए
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A R Sahil "Aleeg"
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