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A R Sahil "Aleeg"
zindagi men to hai laafaani faqat teen cheez
zindagi men to hai laafaani faqat teen cheez | ज़िंदगी में तो है लाफ़ानी, फ़क़त तीन चीज़
- A R Sahil "Aleeg"
ज़िंदगी
में
तो
है
लाफ़ानी,
फ़क़त
तीन
चीज़
तल्ख़
माज़ी,
ख़ौफ़े-मुस्तक़बिल
या
कोई
क़ुनूत
- A R Sahil "Aleeg"
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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दर्द
ऐसा
है
कि
जी
चाहे
है
ज़िंदा
रहिए
ज़िंदगी
ऐसी
कि
मर
जाने
को
जी
चाहे
है
Kaleem Aajiz
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ज़िंदगी
यूँँही
बहुत
कम
है
मोहब्बत
के
लिए
रूठ
कर
वक़्त
गँवाने
की
ज़रूरत
क्या
है
Unknown
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छोड़कर
तन्हा
मुझे
जन्नत
में
रहने
लग
गए
हो
और
मैंने
ज़िन्दगीं
कर
ली
जहन्नम
शा'इरी
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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धूप
में
निकलो
घटाओं
में
नहा
कर
देखो
ज़िंदगी
क्या
है
किताबों
को
हटा
कर
देखो
Nida Fazli
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ज़िंदगी
एक
फ़न
है
लम्हों
को
अपने
अंदाज़
से
गँवाने
का
Jaun Elia
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बहुत
हसीन
सही
सोहबतें
गुलों
की
मगर
वो
ज़िंदगी
है
जो
काँटों
के
दरमियाँ
गुज़रे
Jigar Moradabadi
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मुझे
फुर्सत
नहीं
अब
वाक़ई
में
बहुत
मसरूफ
हूँ
मैं
ज़िन्दगी
में
Reshma Shaikh
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मलेंगे
हाथों
को
अपने
गवाह
और
सुबूत
ख़ुलूस-ओ-इश्क़
का
जब
हम
निसाब
लिक्खेंगे
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
में
वैसे
नामुमकिन
है
चश्म-ए-मिज़्गाँ
पाए
सुकूँ
कुछ
ख़्वाबों
को
बुन
लूँ
मैं
भी
नींद
अगर
आ
जाए
तो
A R Sahil "Aleeg"
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एक
मुद्दत
बाद
देखा
आइना
जब
मैंने
तो
ये
याद
आया
इश्क़
से
पहले
मैं
क्या
था
इश्क़
कर
के
अब
मैं
भी
क्या
बन
गया
हूँ
A R Sahil "Aleeg"
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सिर्फ़
मेरी
नहीं
है
वो
लैला
मेरे
जैसे
हैं
साठ
सत्तर
और
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
की
एक
कहानी
भी
है
ये
ताजमहल
ग़म
जुदाई
का
सुनाती
भी
है
ये
ताजमहल
हाथ
कटवा
दे
जो
मा'सूम
से
मज़दूरों
के
ख़ूँ-फ़िशानी
की
निशानी
भी
है
ये
ताजमहल
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A R Sahil "Aleeg"
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